प्रदेश के 331 एडेड डिग्री कालेजों के अनुमोदित अध्यापकों द्वारा अपने विनियमितीकरण की मांग को लेकर धरना एवं क्रमिक भूख हड़ताल आज 55वें दिन जारी रही, लेकिन सरकार का कोई भी प्रतिनिधि इनकी सुधि लेने नहीं आया।
लोकबन्धु राजनारायण एवं डॉ. राममनोहर लोहिया के सिद्धान्तो पर चलने वाली सरकार शायद उनके सिद्धान्तो को भूल चुकी है।
संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. केएस पाठक ने कहाकि लोहिया एवं राजनारायण गैर बराबरी एवं अन्याय के विरूद्ध हमेशा संघर्ष करते रहे।
लेकिन आज उनके सिद्धान्तो पर चलने वाली सरकार शायद अपने मार्ग से भटक गयी है इसका जीता-जागता उदाहरण यह है कि एक ही महाविद्यालय में दो तरह की व्यवस्था कायम है।
एक अध्यापक एक लाख रूपये वेतन पा रहा है वहीं समान कार्य करने वाला अध्यापक मात्र 5 हजार से 10 हजार रूपये के बीच वेतन पा रहा है।
ऐसे में इन अध्यापकों ने इतने कम वेतन में कोई भी त्योहार न मनाने का निर्णय लिया है। उसी क्रम में दीपावली, छठ नही मनाया और देव दीपावली भी न मनाने का निर्णय लिया है।
कानपुर विश्वविद्यालय के महामंत्री डॉ.आलोक यादव ने कहा कि अध्यापक बराबर अखिलेश एवं मुलायम सिंह की आरती करते रहे लेकिन पत्थर दिल सरकार का कलेजा नही पिघला।
आने वाले दिनो में यदि सरकार ने विनियमितीकरण का वादा पूरा नही किया तो हम और भी बड़ा आन्दोलन करने को बाध्य होंगे।
कानपुर के ही डॉ.देशबन्धु गुप्ता एवं डॉ.एनके सिंह ने कहा कि यह आन्दोलन जन आन्दोलन का रूप ले चुका है यदि सरकार ने अविलम्भ फैसला नही किया तो लोकसभा में मुँह की खानी पड़ेगी।
लखनऊ के जिलाध्यक्ष डॉ.एसके शुक्ला ने कहा कि जबतक हमारी मांगे पूरी नही होंगी हम कोई भी त्योहार नही मनाएंगे।
डॉ.एमएम फारसोली, डॉ.बुसरा खातून, डॉ.अहमद काजमी, डॉ.राजीव अग्रवाल, डॉ.ममता शुक्ला, डॉविकास खुराना, डॉ.अमरनाथ यादव, डॉ.नितेश यादव, डॉपुष्पलता, डॉ.मेहदी, आदि सहित प्रदेश के सैकड़ो शिक्षक उपस्थित रहें।