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Global AI Impact Summit-2026: सीएम योगी बोले- लखनऊ को एआई सिटी के रूप में विकसित करने का कार्य प्रगति पर है

Mon, 12 Jan 2026 11:14 AM IST
भूपेन्द्र सिंह अमर उजाला ब्यूरो, लखनऊ

सार

राजधानी में ग्लोबल एआई इंपैक्ट सम्मेलन-2026 का आयोजन किया गया। इसमें केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद व सीएम योगी ने हिस्सा लिया। आगे पढ़ें अपडेट...
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Global AI Impact Summit-2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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राजधानी लखनऊ में सोमवार को देश में पहली बार ग्लोबल AI इंपैक्ट सम्मेलन-2026 का आयोजन किया गया। इसके तहत एआई एवं स्वास्थ्य नवाचार सम्मेलन स्वास्थ्य सेवाओं में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के माध्यम से नवाचार, तकनीकी प्रगति और भविष्य की संभावनाओं को सशक्त दिशा देने की पहल की गई।

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कार्यक्रम का शुभारंभ केंद्रीय राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक एवं राज्यमंत्री अजीत पाल मौजूद रहे।

एआई से स्वास्थ्य नीतियों को अधिक सटीक बनाया जा सकता है

इस मौके पर सीएम योगी ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में एआई के प्रयोग से स्वास्थ्य नीतियों को अधिक सटीक और प्रभावी बनाया जा सकता है। महामारियों, वेक्टर जनित रोगों के संबंध में डेटा कलेक्शन और उसके फीडबैक से बेहतर निर्णय, बेहतर नीति और बेहतर परिणाम सुनिश्चित किए जा सकते हैं। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं में तकनीकी उन्नयन और नई तकनीक के प्रयोग को प्रोत्साहित करती रही है। मेडिकल डिवाइस पार्क, फार्मा पार्क, लखनऊ में मेडिटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, गौतम बुद्ध नगर में एआई एंड इनोवेशन आधारित उद्यमिता केंद्र, आईआईटी कानपुर में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस तथा लखनऊ को एआई सिटी के रूप में विकसित करने का कार्य प्रगति पर है। यूपी एआई मिशन के तहत लगभग दो हजार करोड़ के कार्यक्रम अगले तीन वर्षों में चरणबद्ध रूप से लागू किए जाएंगे।

सीएम ने आगे कहा कि 11 वर्षों में प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में हमने देश में तकनीक के प्रभाव को जमीनी धरातल पर मूर्त रूप लेते देखा है। आठ वर्षों से यूपी की डबल इंजन सरकार ने आधुनिक तकनीक के माध्यम से शासन के विजन, नीतियों और वेलफेयर योजनाओं को अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक पहुंचाने में सफलता हासिल की है। हमने प्रदेश की सार्वजनिक वितरण प्रणाली में 80 हजार दुकानों पर ई-पॉस मशीनें लगवाईं। छापेमारी में 2017 से पहले गरीब लोगों के नाम से बनाए गए 30 लाख फर्जी राशन कार्ड बरामद किए। इसके बाद पात्र व्यक्तियों तक योजना का लाभ पहुंचाया। डीबीटी के माध्यम से 1 करोड़ 6 लाख परिवारों को वृद्धावस्था, निराश्रित महिला और दिव्यांगजन पेंशन का लाभ सीधे उनके बैंक खातों में पहुंचा रही है। 
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प्रदेश में 81 मेडिकल कॉलेज और दो एम्स संचालित हैं- सीएम 

उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले केवल 40 मेडिकल कॉलेज थे। आज 81 हो चुके हैं। दो एम्स भी संचालित हैं। कोविड-19 से पहले कई जिलों में आईसीयू की सुविधाएं नहीं थीं। ऑक्सीजन प्लांट, डायलिसिस, ब्लड बैंक और डिजिटल डायग्नोस्टिक सुविधाओं का अभाव था। आज ये सभी सुविधाएं प्रत्येक जनपद में हैं। कोविड काल में शुरू किए गए वर्चुअल आईसीयू और टेली मेडिसिन सेवाओं का भी लाभ दूर-दराज क्षेत्र के लोगों को मिल रहा है।

सीएम ने कहा कि जिस बीमारी से हर वर्ष 12-15 सौ बच्चों की मृत्यु होती थी। आज इंसेफेलाइटिस से होने वाली मृत्यु शून्य है। मातृ मृत्यु दर, शिशु मृत्यु दर और संस्थागत प्रसव के क्षेत्र में भी प्रदेश ने उल्लेखनीय सुधार किया है। टीबी उन्मूलन की दिशा में एआई आधारित टूल्स के माध्यम से रोगियों और जोखिम क्षेत्रों की पहचान, उपचार और निगरानी को प्रभावी बनाया गया है। विशेष जोर देते हुए कहा कि एआई मानव द्वारा संचालित होना चाहिए। मानव एआई द्वारा संचालित न हो। हमें आने वाले दिनों में इस संतुलन को बनाए रखना भी आवश्यक है। 

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री जितिन प्रसाद, उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक, उत्तर प्रदेश सरकार में आईटी एवं इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग के मंत्री सुनील शर्मा, राज्यमंत्री अजीत पाल, नीति आयोग के सदस्य डॉ. वी. के. पॉल एवं अपर मुख्य सचिव, चिकित्सा अमित कुमार घोष सहित अनेक विषय विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।
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