पांच लड़कियों को तस्करी कर ले जा रहे दो लोगों को जीआरपी और आरपीएफ ने मंगलवार शाम धर दबोचा। नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस से इन्हें असम से दिल्ली ले जाया जा रहा था। पांचों लड़कियां नाबालिग हैं।
इनमें से एक लड़की को दोबारा ले जाया जा रहा था। उसने बताया कि लड़कियों को दिल्ली में एक महिला को सौंप दिया जाता है। इसके बाद दिल्ली और आसपास के जिलों के घरों में जबरदस्ती काम करने भेज दिया जाता है।
लड़कियां पहुंचाने वाले को 10 से 20 हजार रुपये कमीशन मिलता है। पुलिस पकड़े गए दोनों आरोपियों से पूछताछ कर रही है। वहीं लड़कियों को चाइल्ड लाइन संस्था को सौंप दिया गया है।
असम से दिल्ली जा रही नार्थ ईस्ट एक्सप्रेस में इलाहाबाद से आरपीएफ की महिला टास्क फोर्स चढ़ी। एसआई रिंकू सिंह, कांस्टेबल निशा गौतम और सरिता के साथ चेकिंग करने लगीं।
इसी दौरान पांच लड़कियों का एक महिला यात्री से विवाद होने लगा। एसआई ने विवाद निपटाने के बाद लड़कियों से बातचीत की। सभी ने बताया कि वह दिल्ली जा रही हैं और उनके साथ के दो लोग दूसरी बोगी में बैठे हैं। इस पर एसआई को शक हुआ।
मैडम की तलाश में पुलिस
उन्होंने आरपीएफ थाना प्रभारी और जीआरपी इंस्पेक्टर त्रिपुरारी पांडेय को सूचना दी। शाम करीब 4:35 बजे ट्रेन सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर एक पर पहुंची।
जीआरपी और आरपीएफ की टीम ने बोगी को घेरकर पांचों लड़कियों और दोनों आरोपियों असम के मंदार कुट्टी कोकराझार निवासी हरघा उरंग, डलावरी पट्टू अक्षय के अशोक लकड़ा को पकड़ लिया। पांचों लड़कियां भी कोकराझार जिले की हैं।
दोनों आरोपियों ने पूछताछ में लड़कियों को रिश्तेदार बताया। उधर लड़कियों से महिला पुलिस ने पूछताछ की तो एक फफक पड़ी। बोली उन्हें दिल्ली ले जाकर घरों में काम कराया जाता है।
घर से अकेले निकलने नहीं दिया जाता है। उसने बताया कि वह पहले भी दिल्ली गई थी, सामान और काम के पैसे लेने की वजह से वह दोबारा जा रही है। इसके पहले भी ये दोनों कई लड़कियों को दिल्ली पहुंचा चुके हैं।
इंस्पेक्टर के मुताबिक मामला लड़कियों की तस्करी का है। अशोक और हरघा के खिलाफ बहला फुसलाकर ले जाने और मानव तस्करी की रिपोर्ट दर्ज की गई है। नाबालिग के शोषण के चलते पॉक्सो एक्ट भी लगाया गया है।
दिल्ली में लड़कियों की डिलीवरी लेने वाली महिला की तलाश में पुलिस की एक टीम भेजी गई है। महिला से पूछताछ के बाद और भी जानकारियों हाथ लग सकती हैं।
एक को भांजी, दूसरी को बताया भतीजी
हरघा उरंग ने लड़कियों में एक को भांजी और दूसरी को भतीजी बताया तो पुलिस वालों को शक हुआ। इसके बाद पुलिस ने जब सख्ती से पूछताछ की तो उसने सारा सच उगल दिया।
हरघा ने बताया कि एक लड़की उसकी दूर की रिश्तेदार है। बाकी उसके जिले की रहने वाली हैं। वह लड़कियों को दिल्ली में एक मैडम को सौंप देता है। मैडम इन्हें दूसरे घरों में काम पर भेज देती हैं।
लड़कियों को पहुंचाने पर उसे प्रति लड़की 10 हजार रुपये कमीशन मिलता है। वहीं लड़की को दो हजार रुपये प्रतिमाह पगार मिलती है। जिस घर में लड़की को काम दिलाया जाता है। वहां उसके रहने और खाने की व्यवस्था भी होती है।
लड़की के घरवालों को पैसों की जरूरत है तो वो मालिक से पैसा लेकर हरघा के बैंक अकाउंट में जमा कराती हैं। हरघा लड़की के घर में पैसा पहुंचाने की व्यवस्था करता है। इसमें भी उसका कमीशन तय होता है।
एक लड़की ने बताया कि वह एक महीना पहले घर गई थी। मैडम (जिनके घर में काम करती है) ने कपड़े और सामान रख लिए थे। दो महीने की पगार भी नहीं दी। कहा था कि जब लौटकर आना तो सामान और पैसा मिल जाएगा। अब पुलिस सुनीता को लेकर मैडम की तलाश में गई है।
दूसरे आरोपी अशोक ने एक लड़की को अपनी पत्नी बताया। कहा कि उसने प्रेम विवाह किया है। वह लड़की को लेकर भाग गया था। उसके घरवालों ने थाने में रिपोर्ट भी लिखा रखी है। जीआरपी कोकराझार जिले की पुलिस से मामले की जानकारी जुटा रही है।