अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी काबलियत का डंका बजा रहे किंग जार्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) का इतिहास भले ही स्वर्णिम रहा हो लेकिन वर्तमान दागादार हो रहा है।
हाल ही में बीडीएस की इंटर्न छात्रा ने सर्जरी विभाग के प्रोफेसर और जूनियर डॉक्टर पर छेड़खानी का आरोप लगाया है।
इस मामले से पहले वीमेन हैरेशमेंट सेल में दो शिकायतें दर्ज की जा चुकी हैं।
एक मामले में तो छात्राओं के पूरे समूह ने कुलपति से मिलकर शारीरिक और मानसिक शोषण की शिकायत की थी।
एक अन्य मामले में सीनियर रेजीडेंट ने अपने साथी पर इसी तरह का आरोप लगाया है।
सूत्रों के अनुसार छात्राओं के एक पूरे ग्रुप ने जेआर थ्री (रेजीडेंट डॉक्टर) के खिलाफ शारीरिक व मानसिक शोषण का आरोप लगाया है।
इस रेजीडेंट का शिकार पहले एक या दो छात्राएं बनी। कहीं शिकायत न होने पर उसका दुस्ससाहस बढ़ा तो उसने दूसरी छात्राओं से छेड़छाड़ शुरू कर दी।
बताया जा रहा है कि छात्राओं ने कुलपति प्रो. रविकांत से मिलकर शिकायत की। वीमेन हरेशमेंट प्रोटेक्शन सेल ने इस मामले की जांच शुरू कर दी है।
रेजीडेंट ने इस मामले में पाक-साफ बताया, लेकिन कुलपति ने छात्राओं की शिकायत को संज्ञान में लेते हुए प्रथम दृष्टया दोषी पाए जाने पर जेआर थ्री को कक्षाएं लेने और छात्र-छात्राओं से जुड़े हर कार्य से अलग रखने के निर्देश दिए हैं।
इससे वे छात्राओं पर दबाव बनाकर जांच प्रभावित न कर सके। छात्राओं को जब इस मामले में बयान के लिए बुलाया गया तो उन्होंने परीक्षाओं के बाद ही जांच कमेटी के सामने आने के लिए कहा है।
ताकि उनकी परीक्षा और रिजल्ट प्रभावित न हो। इसी तरह प्लास्टिक सर्जरी विभाग का एक अन्य मामला सामने आया है।
विभाग की एक रेजीडेंट ने अपने साथी चिकित्सक पर शोषण का आरोप लगाया है।
इस मामले में भी अभी जांच चल रही है। बताया जा रहा है कि रेजीडेंट डॉक्टर अपने पुराने संबंधों का खुलासा करने की धमकी देकर महिला चिकित्सक को ब्लैकमेल कर रहा है।
सर्जरी विभाग के प्रोफेसर और रेजीडेंट डॉक्टर के खिलाफ अपमानित और छेड़छाड़ करने की शिकायत के मामले की जांच में कई दिन लग सकते हैं।
गर्मी की छुट्टियां होने के कारण वीमेन हैरेशमेंट प्रिवेंशन सेल के कई शिक्षक छुट्टी पर हैं।
सूत्रों का कहना है कि इस मामले में रेजीडेंट डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई न करना प्रोफेसर को भारी पड़ा है। इस मामले की शिकायत के बाद प्रोफेसर ने इंटर्न डॉक्टर को ही डांट दिया था।
इससे इंटर्न को मानसिक प्रताड़ना हुई और रेजीडेंट डॉक्टर ने भी उसे परेशान करना जारी रखा। इसी से परेशान होकर उसने कुलपति से पूरे मामले की शिकायत कर दी।
केजीएमयू में छात्राओं के शोषण के मामले नए नहीं है। कभी शिक्षक तो कभी वरिष्ठों ने उनका शोषण किया।
इससे पहले दंत संकाय के एक वरिष्ठ प्रोफेसर पर भी यौन और शारीरिक शोषण का आरोप लग चुका है। इस पूरे मामले की लंबी जांच चली थी।
कुछ माह पहले भी दंत संकाय में ही एक छात्रा ने प्रोफेसर पर छेड़छाड़ करने का आरोप लगाया था। इस मामले में छात्रा का पूरा परिवार केजीएमयू प्रशासन से मिला था।
केजीएमयू प्रशासन ने मामले को दबा लिया था। इसी तरह जातीय टिप्पणी को लेकर भी छात्र-छात्राएं कई बार शिकायत कर चुके हैं।
इस पर अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष पीएल पुनिया केजीएमयू के छात्रों से मिले भी थे।