उत्तर प्रदेश की आबादी में 4.92 करोड़ महिलाएं विवाहित हैं। इनमें से 3.27 करोड़ का विवाह उनके 19 वर्ष की होने से पहले ही कर दिया गया। जनगणना का यह आंकड़ा 66.46 प्रतिशत बैठता है।
इससे पता चलता है कि करीब दो तिहाई लड़कियां पढ़ाई और कॅरिअर के बारे में सोचने से पहले विवाह के बंधन में बांध दी जा रही हैं। विश्व जनसंख्या दिवस पर जब संयुक्त राष्ट्र संघ ‘इन्वेस्टिंग इन टीनएज गर्ल्स’ थीम के साथ किशोरियों का भविष्य बनाने की जरूरत बता रहा है तो यह आंकड़े दर्शाते हैं कि प्रदेश में लड़कियों का भविष्य किस तरह संवर रहा है।
कम उम्र में विवाह का मतलब जहां इन किशोरियों से अधिक बच्चों का जन्म है, वहीं वे शिक्षा में भी पिछड़ रही हैं। जनगणना विभाग के अनुसार प्रदेश में 15 साल से कम उम्र की 3.48 लाख लड़कियां हैं जो विवाहित हैं।
इन्हीं में से 1.06 लाख ऐसी हैं, जिने कभी स्कूल की शक्ल नहीं देखी। वहीं 58.5 हजार लड़कियां प्राइमरी से आगे नहीं पढ़ सकीं। इसी तरह 15 से 19 वर्ष के आयुवर्ग में 17.65 लाख लड़कियां हैं। इनमें से 6.21 लाख लड़कियां कभी स्कूल नहीं गईं। मिडिल स्कूल से आगे न पढ़ पाने वाली लड़कियों की संख्या 3.10 लाख है।