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यूपी बोर्ड में इस बार भी लखनऊ की बेटियों ने रचा इतिहास

Sat, 10 Jun 2017 02:15 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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रिजल्ट के बाद खुशी मनातीं छात्राएं - फोटो : amar ujala
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सीबीएसई और आईएससी के बाद यूपी बोर्ड के रिजल्ट में भी बेटियों ने अपनी सपलता का परचम लहरा दिया है। बोर्ड की ओर से जारी लखनऊ की इंटरमीडिएट की टॉप-10 सूची में कुल 20 स्टूडेंट्स ने अपना स्थान बनाया है। इनमें से 15 छात्राएं और केवल एक ही छात्र है।
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हाईस्कूल में स्थिति इससे थोड़ी बेहतर है। राजधानी की हाईस्कूल की टॉप-10 सूची में 13 स्टूडेट हैं। इनमें नौ छात्र और चार छात्राएं हैं। दोनों को मिलाया जाए तो यह 33 में से 19 बेटियों और 14 छात्र टॉप-10 सूची में शामिल हैं। बोर्ड परीक्षा में हाईस्कूल के मुकाबले इंटरमीडिएट का रिकार्ड थोड़ा बेहतर रहा।

राजधानी में इंटरमीडिएट में राजकीय, अनुदानित और बड़े निजी विद्यालयों के 90 फीसदी से ज्यादा परीक्षार्थी सफल रहे। हाईस्कूल में रिजल्ट थोड़ा निराशाजनक रहा। राजधानी में हाईस्कूल में पास होने वाले स्टूडेंट्स का प्रतिशत ज्यादातर कॉलेजों में 80 से 90 फीसदी के बीच ही रहा। हांलाकि कई स्कूलों में शत-प्रतिशत परीक्षार्थी उत्तीर्ण हुए।
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इंटर में कायम पर दसवीं में पिछड़ गया लखनऊ

रिजल्ट के बाद खुशी मनातीं छात्राएं - फोटो : amar ujala
यूपी बोर्ड के रिजल्ट में इंटरमीडिएट में लखनऊ का पास प्रतिशत भले ही बीते साल के मुकाबले कम हो गया हो, लेकिन पास प्रतिशत के मामले में प्रदेश में उसका नंबर पिछले साल की तरह पांचवा ही है।

लखनऊ में वर्ष 2017 में 44,751 परीक्षार्थी  पंजीकृत थे। इसमें 43122 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए और 38949 अभ्यर्थी पास हुए। इस तरह से पास प्रतिशत 90.32 प्रतिशत रहा। बीते साल 47629 पंजीकृत परीक्षार्थियों में से 43296 पास हुए थे। इस तरह से पास प्रतिशत 95.25 था।

वर्ष 2015 में पास प्रतिशत 94.38 प्रतिशत और प्रदेश में 10वां स्थान था। उस समय 50454 पंजीकृत परीक्षार्थियों में 45939 पास हुए थे। इसी तरह हाईस्कूल में 78.86 पास प्रतिशत के साथ लखनऊ का प्रदेश में 47वां स्थान है। इस साल हाईस्कूल में 57923 में से 42732 परीक्षार्थी पास हुए हैं।

वर्ष 2016 में 60223 में से 48864 परीक्षार्थी पास हुए थे। पास प्रतिशत 96.52 और लखनऊ का प्रदेश में 39वां स्थान था। वर्ष 2015 में 57882 परीक्षार्थियों में से 44516 पास थे। पास प्रतिशत 81.96 और प्रदेश में 41वां स्थान था।

मैथ्स ने बिगाड़ा प्रतिशत

यूपी बोर्ड के रिजल्ट में इस बार मैथ्स और अंग्रेजी में स्टूडेंट्स को कम नंबर मिले। मैथ्स में कुछ बच्चों ने 100 में से 100 नंबर हासिल किए, लेकिन फेल होने और कम नंबर मिलने के मामले में सबसे आगे मैथ्स ही रही। खराब रिजल्ट के मामले में दूसरे नंबर पर अंग्रेजी रही।

वहीं, हमेशा की तरह इस बार भी विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में स्टूडेंट्स को खूब नंबर मिले। उत्तर प्रदेश प्रधानाचार्य परिषद के संरक्षक और अमीनाबाद इंटर कॉलेज के पूर्व प्रिंसिपल डॉ. जेपी मिश्र ने बताया कि मैथ्स का हौव्वा स्टूडेंट्स पर अभी भी हावी है। इस साल स्टूडेंट्स मैथ्स और अंग्रेजी में ज्यादा फेल हुए हैं।

हाईस्कूल में इंटरनल से मिले वाले 30 नंबर के बावजूद स्टूडेंट्स इन विषयों में 90 से पार कम ही जा सकें। वहीं, दूसरी ओर विज्ञान और सामाजिक विज्ञान में स्टूडेंट्स को जमकर नंबर मिले हैं। यहां तक इन विषयों में विशेषकर हाईस्कूल में स्टूडेंट्स ने सौ में से सौ नंबर हासिल किए हैं।

पापा होते तो मारे खुशी के फूले नहीं समाते

अपने परिवार के साथ खुशियां मनाते हुए आदर्श शुक्ला। - फोटो : amar ujala
आदर्श शुक्ला अपनी सफलता पर पापा विभूति शरण शुक्ला को याद कर थोड़ा गमगीन हो जाता है। कहता है आज पाता होते तो यह खुशी कई गुना बढ़ गई होती।

एलपीएस आनंद नगर के छात्र आदर्श ने हाईस्कूल में 92.2 प्रतिशत अंक  प्राप्त कर लखनऊ में टॉप किया है। आदर्श के पिता की वर्ष 2012 में हार्ट अटैक से मृत्यु हो गई थी। मां आशा शुक्ला गृहिणी हैं। मामा एनसी मिश्रा सीआईडी इंस्पेक्टर हैं।

आदर्श ने बताया कि उन्हें यहां तक पहुंचाने का श्रेय मामा और मौसी को जाता है, जिन्होंने उसे बढ़ावा दिया और हमेशा आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। आदर्श को गणित से बहुत लगाव है, यही वजह है कि वह गणितज्ञ बनना चाहता है।

बकौल आदर्श, सेल्फ स्टडी ही सफलता का मूलमंत्र है। हार्ड वर्क और नियमित पढ़ाई से ही बेहतर अंक आने की उम्मीद रहती है। यही टिप्स वे दूसरे छात्रों को भी देते हैं। आदर्श ने अपनी सफलता को पूरे परिवार को समर्पित किया है। बड़ा भाई बैंक में नौकरी करता है। उसने भी आदर्श को मन लगाकर पढ़ने के लिए प्रेरित किया।
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आईएएस अफसर बन करना चाहती हैं लोगों की सेवा

अपनी मां के सा‌थ आकृति - फोटो : amar ujala
एलपीएस आनंद नगर की छात्रा आकृति राज श्रीवास्तव सिविल सर्विसेस में जाना चाहती है। वह कहती है कि आईएएस अफसर बनकर मजबूर लोगों की सेवा करनी हैं।

आकृति ने इंटर में 94.4 प्रतिशत अंक अर्जित कर न केवल लखनऊ में टॉप पर रही हैं बल्कि पूरे प्रदेश में आठवां स्थान भी प्राप्त किया है। आकृति के पिता सचेंद्र कुमार श्रीवास्तव अधिवक्ता हैं और मां रजनी श्रीवास्तव गृहिणी। बकौल आकृति, सफलता का कोई शॉर्टकट नहीं होता है।

हाईस्कूल में उन्होंने 87.6 प्रतिशत अंक प्राप्त किए थे। नियमित पढ़ाई और कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने प्रदेश की मेरिट सूची में स्थान पाया है। उन्होंने लिखकर काफी प्रैक्टिस की थी। दूसरे बच्चों को टिप्स देते हुए कहती हैं कि रोज पढ़ें, मन लगाकर पढ़ें।

अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता को देती हैं, जिन्होंने उन्हें काफी मोटिवेट किया। वहीं, शिक्षकों को धन्यवाद देना भी नहीं भूलतीं, जिन्होंने उनके हर सवालों का तार्किक ढंग से जवाब दिया।
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