लखनऊ। केजीएमयू में क्लीनिकल इम्यूनोलॉजी और रुमेटोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रो. पुनीत कुमार के मुताबिक ल्यूपस (सिस्टेमिक ल्यूपस एरिथेमेटोसस) की समस्या 15 साल की किशोरियों से 45 वर्ष तक की महिलाओं में ज्यादा मिलती है।
यह एक आटो इम्यून बीमारी है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली खुद के शरीर की कोशिकाओं पर हमला करने लगती है।
डॉ. पुनीत कुमार ने बताया कि ल्यूपस बीमारी में प्रतिरक्षा प्रणाली त्वचा, जोड़ों, गुर्दे, हृदय, फेफड़े, रक्त कोशिकाएं और मस्तिष्क को प्रभावित करती है। पूरी तरह से इसका कारण पता नहीं है, लेकिन कई बार यह आनुवंशिक होता है। इसमें जोड़ों में दर्द और सूजन, चेहरे पर तितली के आकार का दाना, सूर्य के प्रकाश के प्रति संवेदनशीलता, बुखार, सांस फूलना और आंख सूजने की समस्या हो सकती है।
प्रो. उर्मिला धाकड़ ने बताया कि इस बीमारी का पूरी तरह से इलाज मौजूद नहीं है, लेकिन जागरूकता से इसके लक्षणों को काबू किया जा सकता है। मौके पर डॉ. किशन, डॉ. लिली और डॉ. मुकेश मौर्य मौजूद रहे।