कैसरबाग के कैपर रोड स्थित जहूरबख्श गिरजाघर में रहने वाली नादिया माक्स (25) ने मंगलवार दोपहर खुदकुशी कर ली। उसने ऑनलाइन पेस्टीसाइड (जहर) मंगाकर पी लिया। दोपहर को घर आई उसकी मां रोजी ने लोगों की मदद से दरवाजा तोड़ा तो नादिया मृत अवस्था में मिली। रोजी का कहना है कि करीब तीन महीने से वह अवसाद में थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है।
प्रभारी निरीक्षक डीके उपाध्याय ने बताया कि नादिया के पिता जैस्टर माक्स की मृत्यु हो चुकी है। वह गिरजाघर के परिसर में बने क्वार्टर में मां रोजी के साथ रहती थी। रोजी मिशनरी स्कूल में शिक्षिका है। मंगलवार सुबह वह बेटी को घर पर अकेले छोड़कर स्कूल चली गई थीं।
गिरजाघर के परिसर में रंग-रोगन का काम चल रहा था। मजदूर अमित ने बताया कि दोपहर करीब 12.30 बजे एक डिलीवरी बॉय आकर नादिया को पैकेट दे गया था। करीब दो बजे रोजी घर आईं तो दरवाजा भीतर से बंद मिला। उन्होंने बेटी को पुकारा लेकिन दरवाजा नहीं खुला। रोजी ने अमित व अन्य मजदूरों को बुलाया।
सबने मिलकर दरवाजा तोड़ दिया। भीतर का नजारा देखकर रोजी की चीख निकल गई। नादिया बेड के नीचे पड़ी हुई थी। पास ही आधे से ज्यादा खाली जहर की एक शीशी पड़ी थी।
आनन-फानन नादिया को ट्रामा सेंटर ले जाया गया जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। रोजी ने बताया कि नादिया ने लखनऊ विश्वविद्यालय से एमए किया था। तीन महीने पहले उसने पीएचडी के लिए आवेदन किया था।
वह अवसाद की शिकार हो गई थी। घर से निकलना और लोगों से मिलना-जुलना व बातचीत भी बंद कर दिया था। रोजी ने निजी अस्पताल में उसका उपचार कराया लेकिन कोई फायदा नहीं मिला। कुछ दिनों से नूर मंजिल में उसका उपचार चल रहा था। वह अवसाद में क्यों थी? इसका पता नहीं चल पाया है।