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एलयूः बीएससी मैथ्स छोड़ सभी कोर्सेज में बढ़ीं छात्राएं, पिछले चार साल के मुकाबले ज्यादा एडमिशन

Fri, 02 Aug 2019 06:58 PM IST
लखनऊ ब्यूरो सचिन त्रिपाठी/अमर उजाला, लखनऊ
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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छात्राओं को लखनऊ विश्वविद्यालय का माहौल रास आने लगा है। पिछले चार साल की बात करें तो इस साल बीए, बीकॉम, एलएलबी और बीबीए जैसे पाठ्यक्रमों में छात्राओं का प्रवेश प्रतिशत सर्वाधिक रहा है। बीएससी में भी सिर्फ पिछले साल ही छात्राओं का प्रवेश प्रतिशत इस साल से बेहतर था।

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बीएससी बायो में भी इस साल से बेहतर प्रवेश प्रतिशत वर्ष 2016 में ही था। स्नातक स्तर पर छात्राओं की भागीदारी भले ही अभी 50 फीसदी नहीं पहुंची है, मगर बदलाव सकारात्मक हैं। लविवि में बीएससी बायो में हमेशा से ही छात्राओं का दबदबा रहा है।

इस साल भी बीएससी बायो में बेटियों का प्रवेश प्रतिशत 66.11 प्रतिशत रहा है। बीते साल यह आंकड़ा 62.30 फीसदी ही था। बीए में तो बेटियों का प्रवेश प्रतिशत बढ़कर 42 फीसदी हो गया है। एलएलबी ऑनर्स और बीकॉम तथा बीबीए जैसे पाठ्यक्रमों में बालिकाओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
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इस साल एलएलबी में 37.81, बीकॉम में 45.85, बीबीए में 43.76 फीसदी छात्राएं हो गई हैं। पिछले कई वर्षों में यह प्रतिशत सर्वाधिक है। लविवि प्रशासन पढ़ाई के बेहतर माहौल तथा अनुशासन को इसकी वजह बता रहा है। कुलपति प्रो. एसपी सिंह के अनुसार परिसर में जब शांति होगी तथा पढ़ाई का माहौल बनेगा तो अभिभावक भी अपनी बेटियों को किसी दूसरे संस्थान के बजाय यहां भेजना पसंद करेंगे।

पीजी में हमेशा से आगे रहीं छात्राएं

प्रतीकात्मक तस्वीर
लविवि ने अभी तक इस साल का परास्नातक दाखिलों का ब्योरा नहीं जारी किया है। लेकिन परास्नातक और पीएचडी में हमेशा से ही छात्राओं का प्रतिशत ज्यादा बेहतर रहता है। लुआक्टा केपूर्व अध्यक्ष डॉ. मौलिंदु मिश्रा के अनुसार स्नातक के बाद छात्र जहां नौकरी और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारियों में लग जाते हैं, वहीं बेटियां परास्नातक की पढ़ाई करने के बाद पीएचडी करके शिक्षा के क्षेत्र में जाना चाहती हैं।

बेटियों के लिए सुरक्षित है परिसर
तीन साल पहले कुलपति का कार्यभार ग्रहण करते हुए ही मैंने यह संकल्प लिया था कि परिसर में शैक्षिक वातावरण का सृजन किया जा सके। सिलेबस में बदलाव, समय से परीक्षा, मूल्यांकन में पारदर्शिता और परिसर में अनुशासन की वजह से ऐसा संभव हो सका है। परिसर न सिर्फ बेटियों के लिए सुरक्षित है बल्कि उनके लिए तमाम संभावनाएं भी पैदा कर रहा है। - प्रो. एसपी सिंह, कुलपति, लविवि

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