लविवि ने अभी तक इस साल का परास्नातक दाखिलों का ब्योरा नहीं जारी किया है। लेकिन परास्नातक और पीएचडी में हमेशा से ही छात्राओं का प्रतिशत ज्यादा बेहतर रहता है। लुआक्टा केपूर्व अध्यक्ष डॉ. मौलिंदु मिश्रा के अनुसार स्नातक के बाद छात्र जहां नौकरी और प्रतियोगी परीक्षा की तैयारियों में लग जाते हैं, वहीं बेटियां परास्नातक की पढ़ाई करने के बाद पीएचडी करके शिक्षा के क्षेत्र में जाना चाहती हैं।
बेटियों के लिए सुरक्षित है परिसर
तीन साल पहले कुलपति का कार्यभार ग्रहण करते हुए ही मैंने यह संकल्प लिया था कि परिसर में शैक्षिक वातावरण का सृजन किया जा सके। सिलेबस में बदलाव, समय से परीक्षा, मूल्यांकन में पारदर्शिता और परिसर में अनुशासन की वजह से ऐसा संभव हो सका है। परिसर न सिर्फ बेटियों के लिए सुरक्षित है बल्कि उनके लिए तमाम संभावनाएं भी पैदा कर रहा है।
- प्रो. एसपी सिंह, कुलपति, लविवि