समाजवादी चिंतक दीपक मिश्र ने केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्वनी वैष्णव और केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के अध्यक्ष प्रसून जोशी को पत्र लिखकर घूसघोर पंडत शीर्षक निरस्त करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रणाली सुनिश्चित करने की आवश्यकता है जिससे भविष्य में ऐसी गलतियों की पुनरावृत्ति न हो। फिल्म का शीर्षक आपत्तिजनक और अपमानकारी है। किसी भी समूची जाति को इस तरह सार्वजनिक रूप से घूसघोर कहना दुराग्रहपूर्ण - दुर्भाग्यशाली दुर्भावना है, इससे समाज में जातिगत विभेद व विषैला वैमनस्य फैलेगा।
उन्होंने कहा कि भारतीय सिनेमा का आदर्श हमेशा से सद्भाव और आपसी समरसता को बढ़ाना रहा है । किसी को भी अपने आर्थिक हितों और स्वार्थ सिद्धि के लिए समाज में अपसंस्कृति फैलाने की इजाजत नहीं दी जा सकती। उन्होंने जोर देकर कहा कि पंडित की जगह यदि यादव, मुसलमान,दलित,पाल,पासी, लोधी, धोबी आदि संजाति सूचक शब्द भी होते, तब भी वे और समाजवादी बौद्धिक सभा इतना ही प्रखर और प्रबल विरोध करती।