फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

काम की बंदरबांट से उलझा गाजियाबाद हज हाउस

Sat, 30 Nov 2013 01:19 AM IST
शोभित श्रीवास्तव/लखनऊ
विज्ञापन
विज्ञापन
गाजियाबाद हज हाउस का मामला कई निर्माण एजेंसियों के कारण उलझ गया है।
विज्ञापन


हज समिति ने अलग-अलग समय में अलग-अलग कार्यदायी संस्थाओं से यह काम कराया है, लेकिन किस निर्माण एजेंसी ने क्या काम किया इसका हिसाब ही नहीं मिल रहा है।

हज हाउस में जो काम हुए हैं उसमें भी कार्यदायी संस्थाओं के विरोधाभाषी कागज हैं। यही वजह है कि वित्त विभाग हज हाउस के लिए और धन रिलीज नहीं कर रहा है।

अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री आजम खां ने 27 नवंबर को गाजियाबाद हज हाउस को लेकर मुख्य सचिव जावेद उस्मानी को कड़ा पत्र लिखा था।

उनकी नाराजगी वित्त विभाग पर थी। विभाग ने हज हाउस में खर्च हुए पैसों का हिसाब मांगा है। साथ ही और धन जारी करने से इन्कार कर दिया है।

मंत्री की चिट्ठी के बाद अल्पसंख्यक विभाग से लेकर वित्त विभाग तक के अधिकारी गाजियाबाद हज हाउस की पत्रावलियां खंगालने में जुटे हुए हैं।

2005 में सरकार की ओर से पास इस हज हाउस के लिए सरकार अब तक दो किस्तों में 4.28 करोड़ रुपये दे चुकी है।

उत्तर प्रदेश हज समिति भी अपने तीन करोड़ रुपये खर्च होने का दावा कर रही है। यानी अब तक हज हाउस के लिए 7.28 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं।

इसके बाद हज समिति ने सरकार से जब और पैसे रिलीज करने की मांग की तो वित्त विभाग ने पुराना हिसाब मांग लिया।

पढ़ें-अब खत में आजम ने रोया दुखड़ा!

हज हाउस में अब तक आवास विकास परिषद, उत्तर प्रदेश प्रोजेक्ट कॉर्पोरेशन लिमिटेड, कंस्ट्रक्शन एंड डिजाइन सर्विसेज सहित कई निर्माण एजेंसियों ने काम किया है।
विज्ञापन


लेकिन किसने क्या काम किया इसका हिसाब शासन को नहीं मिल रहा है। पहले हज हाउस 3.64 करोड़ में बनना था। इसमें 226 लोगों के ठहरने की व्यवस्था थी।

अब इसे 1886 हाजियों के हिसाब से बनाए जाने का प्रस्ताव है। नया प्रस्ताव 41.94 करोड़ रुपये का है।

इसे भी लेकर आपत्ति है कि क्या इतना बड़ा हज हाउस गाजियाबाद में बनाने का औचित्य है? साथ ही जो 41.94 करोड़ रुपये का नया इस्टीमेट आया है उसमें पहले से खर्च हो चुके रुपये शामिल हैं या नहीं? इसका भी जवाब हज समिति ठीक से नहीं दे सकी है।
विज्ञापन


प्रमुख सचिव वित्त के साथ फिर माथा-पच्ची
शुक्रवार को एक बार फिर प्रमुख सचिव वित्त आनंद मिश्र के साथ अल्पसंख्यक कल्याण विभाग के अधिकारियों की बैठक हुई।

इसमें दोनों विभागों के अधिकारी पुराने खर्च के तमाम बिंदुओं पर माथापच्ची करते रहे, लेकिन साफ हिसाब-किताब न मिलने के कारण मामला हल नहीं हो सका।

निर्माण एजेंसियों से होगी पूछताछ
अल्पसंख्यक कल्याण विभाग अब गाजियाबाद हज हाउस में काम कर चुकी सभी निर्माण एजेंसियों के साथ इसकी पूछताछ करेगा।

सोमवार को विभाग के सचिव देवेश चतुर्वेदी ने सभी एजेंसियों की बैठक बुलाई है। एजेंसियों से यह लिखित में लिया जाएगा कि किसने क्या काम कराया है।

पुराने खर्च का हिसाब-किताब लेने के बाद ही अल्पसंख्यक विभाग इसके कागज वित्त विभाग भेजेगा।

(इस खबर पर प्रतिक्रिया देने के लिए नीचे के बॉक्स में कमेट करें, शेयर करने के लिए फेसबुक शेयर बटन पर क्लिक करें)
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें