समाज कल्याण निदेशालय के एक अधिकारी ने बताया कि 2 साल पहले शासन को इस बाबत प्रस्ताव भेजा गया था। लेकिन उस पर कोई निर्णय नहीं हो सका। अब नए सिरे से प्रस्ताव तैयार करके शासन को भेजा जा रहा है। यह प्रस्ताव शासन ने ही मांगा है, इसलिए इसे मंजूरी मिलना तय माना जा रहा है।