एमपीएमएलए कोर्ट ने चित्रकूट की महिला को खनन पट्टी दिलाने के नाम पर लखनऊ बुलाने व धमकी देने के मामले में पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति की ओर से आरोप तय करने से पहले अभियोजन से साक्ष्य पेश करने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। विशेष न्यायाधीश पवन कुमार राय ने कहा, मामला चार साल से लंबित है और हाईकोर्ट का निर्देश है कि ऐसे मामलों का जल्द निपटारा किया जाए। जबकि आरोपी हर तारीख पर ऐसी अर्जी पेश कर रहा कि मामला लंबित रहे।
वहीं, कोर्ट ने इसी मामले में आशीष शुक्ल की ओर से उसे आरोपों से मुक्त करने की मांग वाली अर्जी भी खारिज कर दी। अर्जी में कहा गया था कि उसके खिलाफ कोई सुबूत नहीं है। क्योंकि वादिनी ने बयान दिया कि उसने कोई रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई है। इस पर कोर्ट ने कहा कि यह अर्जी भी मामले को विलंबित करने के लिए दिया गया है।
गौरतलब है कि वादिनी ने 26 अक्तूबर 2016 को गोमतीनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि तीन साल पहले बबलू सिंह, आशीष शुक्ल अपने एक साथी के साथ चित्रकूट आए और उन्हें खनन पट्टा दिलाने के नाम पर लखनऊ बुलाया। वादिनी के लखनऊ आने पर उसे होटल में ठहरा कर छेड़छाड़ की और विरोध पर गालियां व जानमाल की धमकी दी। पुलिस ने विवेचना के बाद पूर्व मंत्री गायत्री प्रजापति समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।