लखनऊ। शहर में खुले में कूड़ा डालने की समस्या दूर करने के लिए 44 आधुनिक कॉम्पैक्टर लगाए जाने थे। हालांकि, दो साल से काम कर रही निजी कंपनियां अब तक केवल 21 कॉम्पैक्टर ही लगा पाई हैं। कंपनियां हर महीने करीब 30 करोड़ रुपये का बिल बनाती हैं, फिर भी सफाई व्यवस्था में लापरवाही हो रही है।
स्वच्छ सर्वेक्षण मानकों के तहत शहर को कूड़ा मुक्त बनाने के लिए खुले पड़ाव घरों को बंद कर कॉम्पैक्टर लगाए जाने हैं। कॉम्पैक्टर में एक बंद कंटेनर होता है, जिसमें कूड़ा सीधे बकेट में गिराया जाता है। फिर बकेट उस कूड़े को अंदर कंटेनर में डाल देती है। यह कूड़ा बाहर नहीं दिखता और कंटेनर को शिवरी प्लांट तक ले जाया जाता है।
कंपनियों की लापरवाही
शहर के 33 वार्डों में सफाई करने वाली लॉयन एनवायरो को 16 कॉम्पैक्टर लगाने थे, पर उसने सिर्फ दो ही लगाए हैं। यह कंपनी हर महीने करीब 12 करोड़ रुपये का बिल बनाती है। लॉयन एनवायरो चार जगहों पर जमीन विवाद को अड़ंगा बता रही है। इनमें इंडस्ट्रियल एरिया, होमगार्ड मुख्यालय, वृंदावन योजना सेक्टर आठ और आशियाना शामिल हैं।
वहीं, 77 वार्डों की जिम्मेदारी संभालने वाली लखनऊ स्वच्छता अभियान (रामकी) को 28 कॉम्पैक्टर लगाने थे, लेकिन उसने 19 ही लगाए हैं। रामकी भी नौ जगहों पर जमीन का अड़ंगा बता रही है। ऐसे में खुले में कूड़ा डाले जाने की समस्या जारी है। यह हाल तब है, जब जिले के प्रभारी मंत्री भी नाराजगी जता चुके हैं।
Iकॉम्पैक्टर लगाने में ढिलाई पर निजी कंपनियों को नोटिस जारी किए गए हैं, जिसमें कहा गया है यह काम प्राथमिकता पर किया जाए। जहां जमीन विवाद है, उसे दूर कराया जा रहा है।I
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पंकज श्रीवास्तव, अपर नगर आयुक्तI
शहर के अलग-अलग जगहों पर पड़ा कूड़ा।
शहर के अलग-अलग जगहों पर पड़ा कूड़ा।
शहर के अलग-अलग जगहों पर पड़ा कूड़ा।
शहर के अलग-अलग जगहों पर पड़ा कूड़ा।