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रोहतास के निदेशकों समेत चार पर गैंगस्टर, वाइस प्रेसीडेंट गिरफ्तार, कर चुके हैं करोड़ों की ठगी

Tue, 04 Jun 2019 04:47 PM IST
ishwar ashish न्यूज डेस्क/अमर उजाला, लखनऊ
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पुलिस की गिरफ्त में नितिन भाटिया - फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ की हजरतगंज पुलिस ने सोमवार सुबह रोहतास के वाइस प्रेसीडेंट को गिरफ्तार कर लिया। दो दिन पहले पुलिस ने कंपनी के सीएमडी, वाइस प्रेसीडेंट सहित चार पर गैंगस्टर लगाया था। इन पर फ्लैट व प्लॉट देने के नाम पर करोड़ों ठगने का आरोप है।

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पुलिस फरार चल रहे तीनों आरोपियों की तलाश में जुटी है। अपर पुलिस अधीक्षक पूर्वी सुरेश चंद्र रावत के मुताबिक हजरतगंज पुलिस ने शनिवार देर शाम रोहतास के सीएमडी परेश रस्तोगी, उसके भाई व निदेशक पीयूष रस्तोगी, पंकज रस्तोगी और वाइस प्रेसीडेंट नितिन भाटिया के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई की थी।

चारों पर हजरतगंज में 24 मुकदमे हैं। वहीं, गोमतीनगर, विभूतिखंड, बाजारखाला, वजीरगंज, गोसाईंगंज व मोहनलालगंज सहित कई थानों में भी केस हैं। पुलिस ने रविवार देर रात विशेष अभियान चलाकर आरोपियों के घर छापेमारी की, हालांकि कोई मिला नहीं।
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सोमवार सुबह डालीबाग में वाहन चेकिंग के दौरान विभूतिखंड स्थित रोहतास प्लूमेरिया निवासी नितिन भाटिया हत्थे चढ़ा। देर शाम उसे जेल भेज दिया गया।

133 आवंटियों को लगाया 16.20 करोड़ का चूना

नितिन भाटिया - फोटो : अमर उजाला
विवेचक व सुल्तानगंज चौकी प्रभारी महेंद्र सिंह के मुताबिक रोहतास के निदेशकों के खिलाफ 133 आवंटियों के 16,20,28,802 रुपये हड़पने का केस किया गया है। रोहतास बॉयर्स एसो. उपाध्यक्ष अभिषेक तिवारी की ओर से दी गई  तहरीर में एक साथ 110 आवंटियों ने केस कराया था।

अभिषेक का आरोप था कि 2015 में निवेशकों ने रोहतास के निदेशकों से सुल्तानपुर रोड और रायबरेली रोड पर बन रही टाउनशिप में फ्लैट व भूखंड के लिए पंजीकरण कराया था। निदेशकों ने ढाई साल में टाउनशिप पूरी करने का इकरारनामा किया था।

हालांकि, समय पूरा होने के बाद पता चला कि टाउनशिप में न कोई काम हुआ और न ही प्रोजेक्ट पूरा करने के लिए सरकारी औपचारिकताएं की गईं। अभिषेक के मुताबिक 500 लोग उनसे जुडे़ हैं, जो रोहतास से ठगे गए।

बाईबैक स्कीम के नाम पर 37 लाख ठगे
प्रभारी निरीक्षक राधारमण सिंह के मुताबिक पीड़ितों ने नितिन पर बाईबैक स्कीम के नाम पर 37,65,000 रुपये ठगने का केस कराया था। अलीगंज के सेक्टर-पी निवासी अजय कुमार चतुर्वेदी ने 21 मार्च 2013 को कंपनी के ऑफिस में संपर्क किया था। वहां नितिन और पीके राय से सुल्तानपुर रोड स्थित योजना में प्लॉट के एग्रीमेंट किए।

अजय ने 21 मार्च 2013 को 15 लाख का चेक दिया। कंपनी ने 2016 में प्लॉट देने का वादा किया। इसके बाद उन्होंने 26 अक्तूबर 2015 को दूसरा चेक दिया। इस बीच कंपनी ने प्लॉट का ऑफर दिया, लेकिन अजय ने रुपये के लिए आवेदन किया। कंपनी ने एक लाख व 65 हजार रुपये के दो चेक दिए, जो बाउंस हो गए।

बिकी दुकानों पर बैंक से कराया 9.49 करोड़ का लोन

डेमो
रोहतास पर बिकी दुकानों को बैंक में गिरवी रखकर 9,49,58,766 रुपये लोन लेने के आरोप लगा। मामले में चौक के खुनखुन जी रोड निवासी वैभव रस्तोगी और हजरतगंज के नूपुर रस्तोगी ने केस कराया था। प्रभारी निरीक्षक ने बताया कि दोनों ने 2005 में विभूतिखंड स्थित रोहतास प्रेेसिडेंसियल आर्केड के भूतल पर दुकानें खरीदने को कंपनी के गंज स्थित कार्यालय में संपर्क किया।

पंकज रस्तोगी, पीयूष रस्तोगी, परेश रस्तोगी और दीपक रस्तोगी से बातचीत के बाद 1100 वर्गफीट की दो दुकानें खरीदीं। 2015 तक वैभव और नूपुर ने पूरी कीमत अदा कर दी। कंपनी से 15 जुलाई 2015 को दुकानों पर कब्जा भी दे दिया गया। हालांकि, विक्रय विलेख नहीं किया।

इस बीच वैभव और नूपुर ने दुकान प्राइम फैशल को किराये पर दे दीं। दबाव डालने पर कंपनी ने 20 सितंबर 2018 को विक्रय विलेख किया। जनवरी में इलाहाबाद बैंक की हजरतगंज शाखा की ओर से आर्केड में नोटिस चस्पा किया गया। इसके बाद पड़ताल में पता चला कि निदेशकों ने बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों की मिलीभगत से पूर्व में बेची जा चुकी संपत्तियों पर लोन लिया है।

निजी कंपनियों को भी गिरवी रखी बिकी हुई संपत्ति

डेमो
संचालकों ने रोहतास प्रेसिडेंशियल आर्केड की संपत्ति को निजी कंपनियों में भी गिरवी रखकर करोड़ों का लोन लिया और रकम भी हड़प ली। किस्तें न चुकाने पर निजी कंपनी ने संपत्तियों पर नोटिस चस्पा किए तो खरीदारों के होश उड़ गए।

ठगी के शिकार इंदिरानगर-ए ब्लॉक के स्वपनिल अग्रवाल, नाका के ऐशबाग स्थित बलरामपुर एस्टेट में रहने वाले गुंजित कालरा और गोरखपुर के हुमांयूपुर बुद्ध वाटिका के अजय कुमार गुप्ता ने परेश, पीयूष रस्तोगी, पंकज के खिलाफ गोमतीनगर थाने में प्राथमिकी कराई।

पुलिस के मुताबिक रोहतास ने कैपिटल फस्ट लिमिटेड कंपनी से 12,28,50,000 रुपये का लोन लिया।  पीयूष और पंकज रस्तोगी गारंटर दिखाए गए। वहीं, आवंटी अजय कुमार के दो और गुंजित कालरा के एक प्लॉट को बैंक में गिरवी रखा। तीनों प्लॉट को मुंबई की दीवान हाउसिंग फाइनेंस कॉरपोरेशन लि. कंपनी को भी गिरवी रखकर 4.25 करोड़ रुपये हड़प लिए।
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एलआईसी के 500 कर्मचारियों को लगाया चूना

डेमो
अलीगंज के सेक्टर-बी स्थित एलआईसी कॉलोनी निवासी अनिल कुमार सिंह के मुताबिक वर्ष 2011 में परेश रस्तोगी व नितिन भाटिया ने बीमा कर्मचारी संघ लिमिटेड डिवीजन के कार्यालय में संपर्क कर कर्मचारियों के लिए टाउनशिप बनाने का झांसा दिया।

22 अप्रैल 2011 को परेश संघ के महामंत्री आलोक तिवारी व अन्य पदाधिकारियों को साइट दिखाने ले गया। उसने बताया कि रोहतास गेटवे सिटी प्रोजेक्ट में 100 एकड़ जमीन है, जिसमें 600 प्लॉट निकाले जाएंगे। बीमा कर्मचारियों के लिए प्लॉट का रेट 5500 रुपये वर्गगज बताया।

परेश ने कहा था कि प्रोजेक्ट तीन साल में पूरा हो जाएगा। साइट देखकर 500 बीमाकर्मियों ने प्लॉट के लिए 10 प्रतिशत एडवांस के तौर पर एक-एक लाख रुपये जमा किए। वर्ष 2012 में परेश ने क्लार्क अवध होटल बुलाकर कंप्यूटर से प्लॉट का आवंटन किया। उसने कहा था कि कंपनी ने प्रदेश सरकार और संबंधित विभागों से सभी तरह की स्वीकृति ले ली है। मई 2015 में आवंटियों ने दूसरी किस्त के रूप में एक लाख रुपये और जमा कर दिए।

रकम मिलने के बाद बदला प्रोजेक्ट का नाम
पुलिस के मुताबिक 28 मई 2015 को रोहतास ने आवंटियों को पत्र भेजा। इसमें दूसरी किस्त मिलने की स्वीकृति देते हुए कहा गया कि रोहतास गेटवे सिटी अब रोहतास सवाना में विलय हो गई है। कंपनी को रोहतास सवाना के नाम से 139 एकड़ इंटीग्रेटेड टाउनशिप का लाइसेंस मिल गया है।

इसका इंट्री गेट, साइट ऑफिस व अन्य काम शुरू हो गया है। पीड़ित के मुताबिक वे कई बार रायबरेली रोड गए, लेकिन रोहतास गेटवे सिटी या रोहतास सवाना सिटी की जमीन मिली न ही कोई काम होता नजर आया। उन्होंने ऑफिस में संपर्क किया तो परेश न कोई अन्य मिला। इसके बाद प्राथमिकी दर्ज कराई।
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