एसटीएफ और गोमतीनगर पुलिस ने सचिवालय में संविदा पर समीक्षा अधिकारी समेत अन्य सरकारी विभागों में नौकरी के नाम पर ठगी करने वाले गिरोह का पर्दाफाश करते हुए सरगना समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। जालसाजों के पास से लैपटॉप, मोबाइल, एटीएम कार्ड, एक एसयूवी और एक कार के अलावा पौने पांच लाख रुपये नकद व 45 बेरोजगार युवक-युवतियों के बायोडाटा मिले हैं।
एसटीएफ के एएसपी विशाल विक्रम सिंह ने बताया कि सरगना आजमगढ़ के तरवा स्थित खरिहानी गांव निवासी और यहां विनीतखंड चार में रहने वाला राकेश कुमार त्रिपाठी है। राकेश विपुलखंड दो में बीएसएन इन्फोटेक नाम से कंपनी खोलकर बेरोजगार युवक-युवतियों को सरकारी विभागों में संविदा पर नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये ऐंठता था। राकेश व उसके साथियों ने राजाजीपुरम निवासी विशाल प्रजापति को सचिवालय में संविदा पर समीक्षा अधिकारी के पद पर नौकरी का झांसा दिया था। इसके लिए ठगों ने 15 लाख रुपये का खर्च बताया था। विशाल ने 25 हजार रुपये नकद दिए थे। ठगों के कहने पर विशाल अपने दोस्त अनुराग को भी कंपनी के अधिकारियों के पास लेकर आया। अनुराग को अयोध्या नगर निगम में संविदा पर नौकरी के लिए 50 हजार रुपये में सौदा तय हुआ, जिसमें से 10 हजार रुपये उससे नकद लिया गया था। शेष रकम नौकरी के बाद देने को कहा गया था। हालांकि, किसी को भी नौकरी नहीं मिली। रुपये वापस मांगने पर जालसाजों ने धमकाते हुए भगा दिया।
विशाल ने गत माह गोमतीनगर थाने में बीएसएन इन्फोटेक कंपनी और उसके संचालक राकेश कुमार त्रिपाठी समेत छह लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। मामले की जांच एसटीएफ कर रही थी। बुधवार रात करीब आठ बजे एसटीएफ ने राकेश और उसके पांच साथियों को विपुलखंड से दबोच लिया। गिरोह में कुछ अन्य कंपनियों के संचालक भी शामिल थे, जिनकी तलाश की जा रही है।
ये हुए गिरफ्तार
विनीतखंड निवासी व आजमगढ़ का राकेश कुमार त्रिपाठी, कृष्णानगर की गायत्री कॉलोनी व मूलरूप से कुशीनगर के तुर्कपट्टी स्थित लाला गुरवलिया गांव का दूधनाथ कुशवाहा, चिनहट में मल्हौर रोड स्थित न्यू नंदी विहार कॉलोनी में रह रहा देवरिया के तरकोलवा बंजरिया निवासी जितेंद्र कुमार सिंह, राजाजीपुरम में रह रहा कानपुर के चकेरी अहिरवां निवासी विकास प्रसाद उर्फ रोमी, मूलरूप से महोबा के चरखारी रामनगर का व यहां पीजीआई में अवध विहार योजना के बसेरा अपार्टमेंट में रहने वाला धीरज कुमार मिश्रा और तालकटोरा की सपना कॉलोनी निवासी कुशीनगर के पटहेरवा चैनपुर का सिद्धनाथ शाह।
15 लाख में समीक्षा अधिकारी और एक लाख में चपरासी बनाने का झांसा
पूछताछ में सिद्धनाथ शाह ने कुबूला कि उसका गिरोह एक युवक से नौकरी के लिए एक लाख से 15 लाख रुपये तक लेते थे। रोमी बेरोजगार युवक-युवतियों को फुसलाकर ऑफिस लाता था। जहां धीरज कुमार, जितेंद्र कुमार और दूधनाथ कुशवाहा डायरेक्टर राकेश कुमार त्रिपाठी से मीटिंग कराते थे। सचिवालय में समीक्षा अधिकारी के पद पर नौकरी के लिए 15 लाख रुपया मांगते थे। लिपिक संवर्ग या कंप्यूटर ऑपरेटर के लिए दो से तीन लाख व चपरासी के लिए 50 हजार से एक लाख रुपये तय था।
साक्षात्कार के बाद थमाते थे फर्जी नियुक्ति पत्र
पूछताछ में सिद्धनाथ ने बताया, बेरोजगार युवक-युवतियों से टोकन मनी के रूप में कुछ रुपये लेकर व्हाट्सएप और ई-मेल के जरिए उन्हें कुछ फॉर्म भेजे जाते थे। फॉर्म भरने के बाद राकेश त्रिपाठी साक्षात्कार लेता था। साक्षात्कार में गोरखा इन्फोटेक कंपनी का संचालक राजीव पटेल और बस्ती सिक्योरिटी कंपनी का संचालक संतोष सिंह भी होते थे। साक्षात्कार के बाद अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण घोषित कर रुपये लेकर फर्जी नियुक्ति पत्र दे दिए जाते थे। नियुक्ति पत्र लेकर अभ्यर्थी संबंधित कार्यालय जाते तब फर्जीवाड़े का पता चलता। वह अपने रुपये वापस मांगते तो जालसाज दूसरी नौकरी दिलाने की बात कहकर टरकाते रहते। दबाव डालने पर या पुलिस से शिकायत की चेतावनी देने पर उन्हें जानमाल की धमकी देकर भगा दिया जाता था।