जी-20 की डिजिटल इकॉनमी वर्किंग ग्रुप की तीन दिवसीय बैठक में डिजिटल कौशल मानव संसाधन तैयार करने और उनके आदान-प्रदान के लिए रोडमैप तैयार किया गया। सदस्य देशों के युवाओं को कौशल प्रदान करने के लिए सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना पर भी सहमति बनी।
बैठक में डिजिटल साक्षरता को बढ़ावा देने से लेकर डिजिटल कौशल के शुरुआती चरण में इंटरमीडिएट, आईआईटी, इंजीनियरिंग, पॉलीटेक्निक के स्तर पर प्रशिक्षित किया जाएगा। बैठक में सामने आया कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, इंटरनेट सेवा, भाषा, क्वांटम सहित अन्य विधाओं में इमर्जिंग टेक्नोलॉजी में कुशल युवाओं की सभी देशों में कमी है।
सभी देश चाहते हैं कि उनके पास कुशल युवा हों। सभी देशों के प्रतिनिधियों ने डिजिटल कुशल मानव संसाधन पर एक ऐसा फ्रेमवर्क तैयार करने पर सहमति दी, जिसमें सभी देशों में डिजिटल स्किल्ड मैनपावर की शैक्षणिक योग्यता की समानता का पता चल सके। इससे पता चलेगा कि किस देश में किस शैक्षिक स्तर का व्यक्ति उनके देश में फिट रहेगा। इसके बाद जी-20 के देश एक दूसरे से डिजिटल कौशल में दक्षता प्राप्त मानव संसाधन का आदान-प्रदान भी कर सकेंगे। यूनेस्को डिजिटल कौशल के लिए टूलकिट भी तैयार करेगा।
पीएम दिशा से छह करोड़ प्रशिक्षित
बैठक में बताया गया कि भारत में डिजिटल साक्षरता के लिए प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (पीएम दिशा) अभियान चलाया जा रहा है। अभियान के तहत अब तक साढ़े छह करोड़ लोग प्रशिक्षित हो चुके हैं। हर परिवार के एक व्यक्ति को प्रशिक्षित करना है। ताकि प्रत्येक व्यक्ति यूपीआई का उपयोग कर सके।
अब पुणे, हैदराबाद और बंगलूरू में होगी बैठक
जी-20 की डिजिटल इकॉनमी वर्किंग ग्रुप की बैठक अब अप्रैल में पुणे, जून में हैदराबाद और अगस्त में बंगलूरू में होगी। बंगलूरू में होने वाले बैठक में जी-20 देशों के आईटी मंत्री शामिल होंगे। अक्तूबर में होने वाली बैठक में देशों के प्रधानमंत्री आएंगे। इसमें डिजिटल इकॉनमी, पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, डिजिटल साइबर क्राइम और एमएसएमई में साइबर सिक्योरिटी की फाइनल रिपोर्ट पेश होगी।