मेट्रो के कोच फ्रांस की कंपनी एलस्टाम बनाएगी। इसके लिए सोमवार को 1070 करोड़ रुपये का ठेका लखनऊ मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (एलएमआरसी) ने कंपनी को दे दिया। कंपनी को 20 ट्रेन के लिए जरूरी 80 कोच की आपूर्ति 65 सप्ताह के अंदर करनी होगी। इन कोच की आपूर्ति के साथ ही परीक्षण, प्रवर्तन, ट्रेन कंट्रोल एवं सिग्नलिंग की जिम्मेदारी भी कंपनी की होगी।
एलएमआरसी के एमडी कुमार केशव ने सोमवार को जानकारी दी कि कोच आपूर्ति का यह टेंडर फ्रांस की कंपनी को भारतीय कंपनी एलस्टाम ट्रांसपोर्ट इंडिया लिमिटेड, बंगलुरू के साथ दिया गया है। इस रोलिंग स्टॉक टेंडर के लिए तीन अंतरराष्ट्रीय कंपनियों ने भाग लिया था।
तकनीकी और वित्तीय बिड में फ्रांस की कंपनी ने बाजी मारी। कंपनी को कोच की आपूर्ति 65 सप्ताह के अंदर ही करनी है। देख जाए तो यह बहुत कम समय है। इसके बावजूद भी हम अपने लक्ष्य दिसंबर 2016 तक कोच की आपूर्ति ट्रांसपोर्ट नगर स्थित डिपो में सुनिश्चित करना चाहते हैं।
उन्होंने बताया कि कंपनी ने कोच को फ्रांस में डिजाइन किया है। कंपनी के चेन्नई के समीप स्थित प्लांट में इनका निर्माण किया जाएगा। हालांकि, ट्रेन कंट्रोल और सिग्नलिंग सिस्टम की आपूर्ति एलस्टाम ट्रांसपोर्ट एसए द्वारा फ्रांस से की जाएगी।
निविदा के काम को तय समय सीमा में ही पूरा कर लिया गया है। इसके लिए मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मिले निर्देश पर हाल ही मुख्य सचिव आलोक रंजन ने भी आदेश दिए थे। यूपी शासन की कोशिश है कि सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए रोलिंग स्टॉक की समय से आपूर्ति हो।
स्टेनलेस स्टील के होंगे कोच
कुमार केशव ने बताया कि लखनऊ में प्रस्तावित मेट्रो सर्विस में एक स्टेशन से दूसरे स्टेशन के बीच कम दूरी एक विशेषता बन गई है। यह दूरी करीब एक किमी. औसतन है। ट्रेन की अधिकतम स्पीड 90 किलोमीटर प्रति घंटा है। राजधानी में गति लेकिन 35 किमी. प्रतिघंटा रहेगी।
इन कोच में ऊर्जा संरक्षण का भी ध्यान रखा गया है। यात्रियों की सुविधा के साथ ही पर्यावरण का भी ख्याल रखा गया है। इन कोच को स्टेनलेस स्टील से बनाया गया है जोकि इसकी क्षमता बढ़ाने के साथ ही एनर्जी इफीसिएंट भी हैं। इनमें रीजनरेटिव ब्रेकिंग का भी प्रावधान है।
इससे ऊर्जा की खपत में 30-35 प्रतिशत की बचत होगी। ट्रेन कंट्रोल सिस्टम में लगे माइक्रोप्रोसेसर सिस्टम से कोच में लगे सभी कंट्रोल नियंत्रित होंगे।
हर दुर्घटना से बचाव के लिए तैयार
कोच में सभी सुरक्षा उपायों को पूरा किया गया है। इनमें ट्रेन के क्रेश होने से बचाने के लिए उपाय, अग्निरोधी पदार्थ का उपयोग, स्मोक सेंसर और आपात काल में यात्रियों को निकालने के लिए इमरजेंसी गेट डिजाइन में शामिल किए गए हैं। सिग्नलिंग सिस्टम पूरी तरह ऑटोमेटिक होगा। ड्राइवर की दखलंदाजी भी मेट्रो के संचालन में बहुत कम होगी।
सीसीटीवी कैमरा से लैस होंगे कोच
यात्रियों की निगरानी से लेकर उनकी सुविधा का ख्याल कोच में रखा गया है। इसमें कोच के अंदर कम शोर, यात्रिओं के एक डिब्बे से दूसरे डिब्बे तक जाने की सुविधा, आपात काल की सूचना सुविधाओं सहित पब्लिक एनाउंसमेंट एंड डिसप्ले सिस्टम, कोच के अंदर सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था, पकड़ने के लिए सुविधाजनक हैंडल, विकलांगजनों के लिए व्हीलचेयर, बड़ी-बड़ी खिड़कियां, लोगों की औसत ऊंचाई को ध्यान में रखकर गेट की हाइट तक का ध्यान कोच को डिजाइन करने में रखा जाएगा।
ऑटोमेटिक ट्रेन सिस्टम
मेट्रो के कोच में ऑटोमेटिक ट्रेन ऑपरेशन सिस्टम लगा है। इससे ट्रेन को कहां रुकना है और कब रुकना है? यह सिस्टम तय करेगा। आटोमेटिक ट्रेन सुपर विजन सिस्टम यह सुनिश्चित करेगा कि ट्रेन का आटोमेटिक मैनेजमेंट ही रूट और गति का नियंत्रण करे।
मामले पर एलएमआरसी के सीपीआरओ अमित कुमार श्रीवास्तव का कहना है कि हमारी पूरी कोशिश है कि रोलिंग स्टॉक पूर्व में बने लक्ष्य की समय सीमा में ही मिल जाए। टेंडर प्रक्रिया समय रहते पूरी हो गई है। अब दिसंबर 2016 तक फ्रांस की चयनित कंपनी को कोच की आपूर्ति करनी होगी।