लखनऊ में खुद को साइबर क्राइम का अफसर बताकर ठगों ने इंदिरा नगर के पटेल नगर निवासी कारोबारी मुक्तेश्वर त्रिपाठी के नाम पर दस लाख का लोन ले लिया। फिर वही रकम अपने अकाउंट में ट्रांसफर करा ली। कारोबारी को मनी लांड्रिंग मामले में दोषी बताया गया था। साइबर क्राइम पुलिस ने ठगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।
मुक्तेश्वर त्रिपाठी ने बताया कि 19 मार्च को दोपहर 2: 20 बजे उनके पास अनजान नंबर से कॉल आई। कॉल करने वाले ने खुद को फेडेक्स कूरियर कंपनी का कर्मी बताया। उसने कारोबारी से कहा कि उनके आधार और मोबाइल नंबर का उपयोग करके 10 मार्च 2024 को एक पार्सल मुंबई से ईरान बुक किया गया है। पार्सल में आईसीआईसीआई के क्रेडिट कार्ड, ड्रग्स और कुछ अन्य सामान मिला है। मुक्तेश्वर के मना करने पर कर्मी ने कहा कि तुम्हारी आईडी का गलत इस्तेमाल हुआ है। इसकी शिकायत आपको मुंबई अंधेरी ईस्ट में साइबर क्राइम दफ्तर में करनी होगी। इसके बाद ठग ने उनकी कॉल साइबर क्राइम दफ्तर में ट्रांसफर कर दी।
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300 आईसीआईसीआई बैंक कर्मी हो चुके गिरफ्तार
कॉल ट्रांसफर होने पर एक युवक ने अपना नाम इंस्पेक्टर प्रमोद सावंत बताया। उसने कहा कि तुम्हारी आईडी से कई शहरों में बैंक अधिकारियों की मिलीभगत से बैंक खाते खोले गए हैं। इनका प्रयोग मनी लांड्रिंग में हो रहा है। तुम भी इस मामले में दोषी हो। घबराने पर आरोपी ने बयान दर्ज कराने का हवाला देते हुए मुक्तेश्वर से स्काइप एप डाउनलोड कराया। वीडियो कॉल पर प्रमोद ने पीड़ित को झांसे में लेने के लिए अपना आईडी कार्ड भी दिखाया। ठग ने कहा कि मनी लांड्रिंग मामले में देश भर से तीन सौ आईसीआईसीआई बैंक कर्मियों को गिरफ्तार किया गया है। तुम्हें भी पकड़ा जाएगा।
खाते की आरबीआई कर रहा निगरानी
आरोपी ने कहा कि यह केस डीएसपी मिलिंद भारवे के पास है। इसके बाद उसने कॉल मिलिंद को ट्रांसफर कर दी। मिलिंद ने व्यापारी से कहा कि मनी लांड्रिंग केस में आरबीआई तुम्हारे बैंक खाते की निगरानी रख रहा है। वह जांच के लिए तुम्हारे खाते में रकम ट्रांसफर करेगा। तुम्हे वहीं रकम साइबर क्राइम के खाते में भेजनी होगी। अगर तुम्हारे खाते में रकम नहीं आती है तो यह सिद्ध हो जाएगा कि तुम मनी लांड्रिंग मामले में दोषी हो।
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एक घंटे में एफआईआर की कॉपी देने की कही बात
बुरी तरह से मानसिक रूप से प्रताड़ित हो चुके मुक्तेश्वर ने ठग की बात मान ली। इसके बाद पीड़ित के आईसीआईसीआई बैंक खाते में उनके नाम पर प्री अप्रूव्ड पर्सनल लोन के दस लाख रुपये खाते में आ गए। इसके बाद ठग के दिए गए दिल्ली के इंडसइंड बैंक खाते में पीड़ित ने दस लाख रुपये जमा कर दिए। इस पर ठग ने उन्हें दोबारा कॉल की और जांच होने पर एक घंटे में उनका नाम हटाकर उन्हें एफआईआर कॉपी भेजने की बात कही। काफी समय बीतने पर ठग ने काॅपी नहीं भेजी तो मुक्तेश्वर ने सीए को घटना के बारे में बताया, तब उन्हें ठगी की जानकारी हुई। इंस्पेक्टर ब्रजेश कुमार यादव के मुताबिक मामले की तफ्तीश चल रही है। साक्ष्यों के आधार पर केस दर्ज किया जाएगा।