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करोड़ाां रुपये की ठगी में शाइन सिटी की कर्मचारी गिरफ्तार

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करोड़ों रुपये की ठगी में शाइन सिटी की कर्मचारी गिरफ्तार
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गोमतीनगर पुलिस ने रीयल एस्टेट समेत तमाम कंपनियों की आड़ में करोड़ों रुपये ठगने की आरोपी शाइन सिटी इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड की कर्मचारी उत्तमा अग्रवाल को बृहस्पतिवार दोपहर गिरफ्तार कर लिया।
एसएसपी कलानिधि नैथानी ने बताया कि ऑपरेशन-420 के तहत गिरफ्तार उत्तमा अग्रवाल को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया गया है।
धोखाधड़ी व ठगी के आरोपी कंपनी के सीएमडी राशिद नसीम, एमडी आसिफ नसीम समेत अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
एसएसपी ने बताया कि चौक में आनंदी माता मंदिर के बगल में रहने वाली उत्तमा करीब दो साल से कंपनी में काम कर रही थी।
वह कंपनी की प्लॉट और वाहन संबंधी योजनाओं तथा ज्वैलरी और इलेक्ट्रानिक उत्पाद को सस्ते दाम पर बेचने का झांसा देकर लोगों से रुपया निवेश कराती थी। उसे मोटा कमीशन दिया जाता था।
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बकौल एसएसपी, सीएमडी राशिद नसीम, एमडी आसिफ नसीम, उत्तमा, सोनल, एकाउंट्स हेड मो. शकील, मो. शबीब, दुश्यंत व मनोज श्रीवास्तव समेत कई लोगों के खिलाफ गोमतीनगर समेत कई थानों में ठगी के दर्जनों मामले दर्ज हैं।
उत्तमा के खिलाफ भी दो साल में धोखाधड़ी और ठगी के 12 मुकदमे लिखे गए हैं। विवेचना में पर्याप्त साक्ष्य मिलने के बाद बृहस्पतिवार को इंस्पेक्टर अमित कुमार दुबे को कंपनी के ऑफिस भेजा गया था।
पुलिस टीम ने उत्तमा को मौके पर गिरफ्तार कर लिया जबकि सीएमडी, एमडी समेत अन्य आरोपी नहीं मिले।
वारंट लेकर आई बिहार पुलिस तब हुई कार्रवाई
शाइन सिटी इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स कंपनी के संचालकों के खिलाफ ठगी के तमाम मुकदमे दर्ज होने के बाद भी स्थानीय स्तर पर पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही थी। बृहस्पतिवार को बिहार पुलिस चेक बाउंस के मामले में कंपनी संचालकों के खिलाफ वारंट लेकर पहुंची तो पुलिस की नींद टूटी। पुलिस सूत्रों ने बताया कि लखनऊ में दर्जनों मामलों के आरोपी को बिहार पुलिस के हाथों में जाने की फजीहत से घबराकर आनन-फानन उत्तमा को पकड़ा गया।
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कंपनीवालों ने बर्बाद कर दी बेटी की जिंदगी
उत्तमा की गिरफ्तारी से उसके परिवारीजन सदमे में हैं। मां अनीता अग्रवाल रोते-रोते बेहाल हो गई हैं। उन्होंने कंपनी के संचालकों पर बेटी की जिंदगी बर्बाद करने का आरोप लगाया। अनीता ने कहा कि बिहार में शाइन सिटी इन्फ्रा प्रोजेक्ट्स कंपनी के सीएमडी और एमडी समेत अन्य लोगों के खिलाफ ठगी व चेक बाउंस के कई मुकदमे दर्ज हैं। पुलिस कंपनी के सात-आठ लोगों के नाम का वारंट लेकर आई थी। ऑफिस में वारंटियों में से कुछ लोग मौजूद भी थे लेकिन उन्होंने चालाकी से खुद को बचा लिया और बेटी उत्तमा को पुलिस के हवाले कर दिया। उन्होंने बताया कि कंपनी के सीएमडी ने उत्तमा को फोटोग्राफी के काम के लिए रखा था लेकिन उससे प्लाट व अन्य उत्पादों में लोगों से निवेश कराया जाता था। कंपनी के संचालकों के साथ ही उत्तमा के खिलाफ भी लगातार मुकदमे दर्ज हो रहे थे, लेकिन उसे कभी आगाह नहीं किया गया। अगर बेटी को पता होता कि वह मुसीबत में फंसती जा रही है तो नौकरी छोड़ देती।
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