पूछताछ में आरोपियों ने कुबूला कि फर्जी नामों से 120 जाली बैंक खाते खोलकर करीब 200 लोगों से अब तक एक करोड़ रुपये जमा करवा चुके हैं। फर्जी पहचान पत्र पर प्री एक्टिवेटेड 200 सिम अंकित ने खरीदे थे। इसके लिए 100 मोबाइल का इस्तेमाल किया। भुगतान के बाद उस सिम व मोबाइल तोड़कर फेंक देते थे। फर्जी नाम, पते पर सिम कार्ड देने में अनुज गौड़ मदद करता था। वो वीआई (वोडाफोन-आईडिया) कंपनी में सिम कार्ड प्रमोटर था। मुंशी पुलिया के सामने कैनोपी लगाकर सिम बेचता था। देहात क्षेत्र में जो लोग कम पढे़ लिखे होते है। उनके नाम पर एक ही आईडी पर कई सिम एक्टिव कर देता था। इसके बाद ग्राहक को एक सिम देकर बाकी सिम ब्लैक में हमें 400 से 500 रुपये में दे देता था।
हमें मिलती है सबक : बैंक खाता संख्या दिए जाने पर ज्यादातर लोग यकीन कर लेते हैं कि जो ऑफर दिया जा रहा है वह सही है। ऐसे में वो आसानी से झांसे में आ जाते हैं। पर, यह खबर हमें सबक देती है कि ऐसे किसी झांसे में न आएं। सबसे पहले कंपनी या बैंक से संपर्क करें।
कई शहरों में फैला है नेटवर्क
प्रभारी एसएसपी विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक, गिरोह का नेटवर्क जयपुर और लखनऊ सहित कई शहरों में फैला है। बरामद डाटा का फोरेंसिक ऑडिट कराया जाएगा। डेटा कहां से चोरी हुआ है, इसकी जानकारी की जा रही है। कंपनियों का डाटा हैकिंग या किसी कर्मचारी से प्राप्त हुआ है। इस संबंध में भी जांच की जा रही है। जाली बैंक खाते किस तरह से खोलेे गए, इसमें बैंक कर्मियों की मिलीभगत के संबंध में भी जांच की जा रही है। डिटेल प्राप्त कर कुल धोखाधड़ी के संबंध में जानकारी की जा रही है। इसके अलावा इंश्योरेंस कंपनी के इन्फार्मेशन सिक्योरिटी पॉलिसी, ऑडिट की विधिवत जांच की जाएगी।
ये सामान हुआ बरामद
चार चेकबुक, आठ पासबुक, दस मोबाइल, पांच आधार कार्ड, चार पैन कार्ड, 11 डेबिट कार्ड, एक निर्वाचन कार्ड, दो पेन ड्राइव, दो डीएल, एक चेकबुक, 78 सिम कार्ड, चार बैंक जमा रसीद, दो फिंगर स्कैनर मशीन, एक कार और 4200 नकद।