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गृह विभाग का समीक्षा अधिकारी बनकर ठगी करने वाला गिरफ्तार, फर्जी पहचान पत्र समेत कई दस्तावेज बरामद

Wed, 16 Sep 2020 08:51 PM IST
प्राची प्रियम माई सिटी रिपोर्टर, लखनऊ
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आरोपी प्रेमसागर - फोटो : अमर उजाला
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लखनऊ की हजरतगंज पुलिस ने गृह विभाग के फर्जी समीक्षा अधिकारी को लोक भवन परिसर से गिरफ्तार किया। उसके पास से कई कूट रचित दस्तावेज बरामद किए गए हैं। इसमें सचिवालय का परिचय पत्र, पास व अन्य दस्तावेज शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक वह लोगों को नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये की ठगी कर चुका है। पुलिस ने आरोपी को जेल भेज दिया है।

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प्रभारी निरीक्षक हजरतगंज अंजनी कुमार पांडेय के मुताबिक मंगलवार देर शाम करीब आठ बजे पुलिस टीम ने लोक भवन परिसर से एक जालसाज को दबोच लिया। अंबेडकरनगर के टांडा स्थित शादीपुर का रहने वाला प्रेमसागर खुद को गृह विभाग में समीक्षा अधिकारी बताता था। 

उसने कई लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर लाखों रुपये वसूले हैं। मंगलवार दोपहर को इंदिरानगर के खुर्रमनगर पंतनगर निवासी अबु फैसल ने तहरीर दी। जिसकी जांच के लिए शाम को पुलिस टीम लोक भवन गई। 
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वहां पुलिस ने प्रेमसागर के बारे में पूछताछ की तो समीक्षा अधिकारी होने की पुष्टि नहीं हुई। इसी बीच प्रेमसागर को परिसर में घूमते हुए देखा गया। पुलिस ने घेराबंदी कर परिसर से उसे दबोच लिया। देर शाम अबु फैसल की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया गया।

नियुक्ति, ट्रांसफर व पोस्टिंग के नाम पर वसूलता था रुपये
पुलिस के मुताबिक पकड़ा गया जालसाज प्रेमसागर खुद को गृह विभाग का समीक्षा अधिकारी बताता था। उसके झांसे में आने वाले बेरोजगारों को नौकरी दिलाने के नाम पर पांच से 10 लाख रुपये तक वसूलता था। यहीं नहीं, कई अधिकारियों व कर्मचारियों से ट्रांसफर व पोस्टिंग के नाम पर भी लाखों रुपये वसूल चुका है। 

रुपये लेने के बाद वह अकसर मोबाइल पर बात करने से बचता था। अगर बात हो गई तो विभाग के उच्चाधिकारियों के साथ मीटिंग में होने की बात कहकर टालमटोल करता था। जब रुपये देने वाले अधिकारी या कर्मचारी का आमना-सामना होता तो उसे वापस करने की बात कहकर निकल जाता। कुछ के दबाव पड़ने पर रुपये भी वापस कर देता था।

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चार साल पहले छोड़ दिया गांव
पुलिस के मुताबिक जालसाज ने नौकरी के नाम पर ठगी का धंधा अपने गांव व आसपास के इलाके से शुरू किया था। वहां 30 से 40 लोगों से नौकरी दिलाने के नाम पर रुपये वसूल चुका था। 

जब ज्यादा तगादा होने लगा और लोग उसके घर पर धमकने लगे तो वहां से भाग निकला। वह पिछले चार साल से लखनऊ में रहता था। लखनऊ पहुंचकर जालसाजी का काम काफी तेजी से रफ्तार पकड़ने लगा। उसने कुछ लोगों के जरिए युवकों को झांसा देना शुरू कर दिया।

लोक भवन पर बुलाता था मिलने के लिए
प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक प्रेमसागर नौकरी दिलाने व ट्रांसफर-पोस्टिंग के लिए लोगों से मिलने के लिए जब भी बुलाता था। उस वक्त वह लोक भवन के पास मौजूद रहता था। वहां लोगों से बातचीत कर पास दिखाकर अंदर चला जाता था। यह सिलसिला कई बार करता ताकि लोगों को भरोसा हो जाए। इसके बाद लोगों से रुपये की लेनदेन की बात करता।

फर्जी पहचान पत्र व पास मिला
पुलिस के मुताबिक जालसाज प्रेमसागर के पास से सचिवालय में गृह विभाग के समीक्षा अधिकारी के पद का पहचान पत्र मिला है। इसके अलावा उसके पास से सचिवालय का पास मिला जिसकी जांच के बाद वह भी कूट रचित पाया गया। 

यहीं नहीं उसने अपनी बाइक पर भी उत्तर प्रदेश शासन लिखवा रखा था। इसके अलावा उसके पास से दो मोबाइल, वाहन पास, 66 विजिटिंग कार्ड (जिस पर उत्तर प्रदेश शासन गृह विभाग लिखा था), एक एटीएम कार्ड, एक चेक एसबीआई व एक चेक पीएनबी, एक लोक सेवा आयोग का प्रार्थना पत्र, एक हाईकोर्ट का आदेश पत्र भी बरामद हुआ।
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