आईसीआईसीआई बैंक की सीईओ चंदा कोचर सहित 11 अधिकारियों के खिलाफ धोखाधड़ी कर 9,85000 रुपये निकालने की रिपोर्ट हजरतगंज थाने में दर्ज कराई गई है।
त्रिवेणीनगर निवासी रिटायर्ड डिप्टी एसपी दिग्विजय सिंह की बेटी श्वेता सिंह का आरोप है कि बैंक की मिलीभगत से ही उसके अकाउंट से रुपये निकाले गए।
हजरतगंज कोतवाली के इंस्पेक्टर विजयमल यादव ने कहा कि सभी नामजद आरोपियों को नोटिस भेजा जाएगा।
श्वेता ने बताया कि वह दिल्ली में रहकर एक निजी स्कूल में पढ़ाती हैं और अपनी कंपनी भी चलाती हैं। आईसीआईसीआई बैंक की हलवासिया शाखा में उनका व दिल्ली की साउथ एक्सटेंशन पार्ट-2 ब्रांच में कंपनी का अकाउंट है।
तीन महीने पहले वह लखनऊ शिफ्ट हो गई थीं। बकौल श्वेता, चार जुलाई को वह अपने पिता और चाचा के साथ पैकिंग के लिए दिल्ली गईं थीं। उसी दौरान उनके दोनों अकाउंट की चेकबुक और एटीएम कार्ड गुम हो गये। उन्होंने बैंक में कस्टमर केयर सर्विस मैनेजर संतोष को इसकी सूचना दी।
श्वेता ने उसे बताया कि पासबुक में तीन-चार खाली चेक में उनके हस्ताक्षर भी हैं। उन्होंने अपना अकाउंट ब्लॉक करने के लिए भी कहा। संतोष ने कस्टमर केयर सेंटर का नंबर देकर उस पर भी शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा।
श्वेता ने अगले दिन ही कस्टमर केयर सेंटर पर भी अकाउंट ब्लॉक कराने के लिए सूचना दे दी। पांच सितंबर को श्वेता के मोबाइल पर बैंक की तरफ से मैसेज आया। इसमें उनके दिल्ली स्थित कंपनी के अकाउंट से चेक के जरिए आठ लाख रुपये निकाले जाने की जानकारी दी गई।
...इसलिए अधिकारियों पर है शक
डेमो
वह कोई कार्रवाई करतीं तब तक एक और मैसेज आया कि हलवासिया ब्रांच से 185000 रुपये दूसरे अकाउंट में ट्रांसफर हो गये हैं। श्वेता हलवासिया स्थित बैंक पहुंची तो वहां सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने ई-मेल से बैंक की सीईओ चंदा कोचर व अन्य अधिकारियों से शिकायत की लेकिन इसका भी कोई जवाब नहीं मिला।
इसके बाद मंगलवार को श्वेता ने हजरतगंज कोतवाली में चंदा कोचर सहित सीनियर मैनेजर कनन, ध्रुपद शाह, शुभ्रो गुप्ता, ज्ञान बराह, संजय चौगुले, नवीन एस, दिल्ली साउथ एक्सटेंशन पार्ट-2 स्थित क्लस्टर ब्रांच की मैनेजर राधिका सक्सेना, ब्रांच मैनेजर श्वेता सेठी, कस्टमर सर्विस मैनेजर संतोष व कैशियर के खिलाफ अमानत में खयानत और आपराधिक षड्यंत्र रचने सहित अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई।
श्वेता का कहना है कि रुपये निकालने में बैंक अधिकारियों की भी मिलीभगत है। उन्होंने चेकबुक खोने की सूचना दर्ज करा रखी थी। इसके बाद भी रुपये निकल गये।
सबसे महत्वपूर्ण बात कि किसी के अकाउंट से बियरर चेक के जरिए 50000 रुपये या इससे अधिक रकम निकालने पर बैंक के अधिकारी तत्काल अकाउंट होल्डर से संपर्क करते हैं और चेक के बारे में जानकारी लेते हैं लेकिन ऐसा ऐसा नहीं किया गया। यही वजह है कि बैंक अधिकारियों की भूमिका कठघरे में है।