उसने सात लोगों की नौकरी के लिए 17.50 लाख रुपये लिए और अपनी कंपनी अल्फा टु ओमेगा के लेटरपैड पर आजमगढ़ व अन्य जनपदों के लिए नियुक्ति पत्र बनाकर उन्हें थमा दिया। नियुक्ति पत्र लेकर सभी अपने-अपने जनपद के स्वास्थ्य विभाग के कार्यालय पहुंचे तो उन्हें भगा दिया गया। विशाल और अजय चंद्र का आरोप है कि अखिलेश अपने भाई नागेंद्र तिवारी और बेटे अमन तिवारी के साथ मिलकर यह फर्जीवाड़ा कर रहा है।
विशाल ने बताया कि उसने अखिलेश से रुपया मांगा तो वह टरकाता रहा। दबाव बनाने पर उसने अपनी कार और एक चेक दिया। कहा कि पांच लाख रुपये देकर कार और चेक वापस ले जाऊंगा। हालांकि, अगली ही रात को वह बिना बताए दूसरी चाबी लगाकर कार वापस ले गया। विशाल ने पुलिस को फोन कर सूचना दी तो 20 मार्च की रात अखिलेश एक कार में छह-सात लोगों को लेकर उसके घर पहुंचा और जानमाल की धमकी दी।
अपहरण, लूट में जा चुका है जेल
अजय चंद्र ने बताया कि दिवाली के दौरान अखिलेश तिवारी को कैसरबाग पुलिस ने अपहरण और लूट के एक मामले में दबोचा था। अजय का यह भी कहना है कि अखिलेश को दो महीने जेल में बंद रखा गया। वह जमानत पर है।