सफल अभ्यर्थियों से उनके डिस्पैच लेटर के नाम पर रिश्वत लेने के मामले में चंद जवान ही शामिल नहीं है, बल्कि इस गोरखधंधे में पूरा अमेठी सेना भर्ती कार्यालय राडार में आ गया है।
इस मामले में अब तक दो जवानों की गिरफ्तारी हुई है जबकि अमेठी सेना भर्ती कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी सहित एक जेसीओ व अन्य जवानों पर भी सेना की खुफिया इकाई की नजर है।
सेना भर्ती कार्यालय अमेठी में कई महीनों से सेना भर्ती रैली में सफल होने वाले उम्मीदवारों से परिणाम आने के बावजूद उनको ट्रेनिंग पर जाने का डिस्पैच लेटर नहीं भेजा जा रहा था।
50 हजार रुपये रिश्वत लेते पकड़ा गया एक जवान
डिस्पैच लेटर दबाने वाले एक जवान को सेना की खुफिया इकाई ने बीते गुरुवार को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ पकड़ा था। सेना की खुफिया इकाई ने अगले ही दिन एक और हवलदार क्लर्क को पकड़ा था।
पूछताछ में यह बात सामने आयी है कि डिस्पैच लेटर को सेना भर्ती कार्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी और उनके एक खास जेसीओ के माध्यम से रोका जाता है। डिस्पैच लेटर वरिष्ठ अधिकारी की सुरक्षा में रखा जाता है।
ऐसे में अधिकारी के कार ड्राइवर व सेना का जवान गणेश तक डिस्पैच लेटर वाले अभ्यर्थियों का ब्यौरा तक उपलब्ध होने पर शक की सुई वरिष्ठ अधिकारी की ओर भी घूमने लगी।
कई और लोगों के भी पकड़े जाने की संभावना
मध्य कमान मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इस पूरे रैकेट में सेना भर्ती कार्यालय अमेठी की भूमिका संदिग्ध है।
यहां पकड़े गए अकेले वह दो जवान केवल मोहरा हैं, जबकि बिना वरिष्ठ अधिकारी की सूचना के बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों को डिस्पैच लेटर न देने पर जांच की दिशा ही बदल गई है। अभी कई और लोगों के पकड़े जाने की संभावना है।
तीन माह में भी न जागे कमांडिंग अधिकारी
अप्रैल में नर्सिंग सहायक के 350 सफल अभ्यर्थियों के परिणाम घोषित होते ही उनको लखनऊ छावनी स्थित सेना मेडिकल कोर केंद्र व कॉलेज के ट्रेनिंग बटालियन में ट्रेनिंग के लिए डिस्पैच लेटर जारी होना शुरू हो गए थे।
जिन अभ्यर्थियों के डाक विभाग से डिस्पैच लेटर अपने गंतव्य तक नहीं पहुंच सके थे, उनकी वापसी के कारणों की रिपोर्ट सीधे शक के दायरे में आए अधिकारी को भेजी गयी थी।
ऐसे में तीन माह से बिना निर्गत किये हुए डिस्पैच लेटर अमेठी सेना भर्ती कार्यालय में पड़े रहने से अधिकारी और इस काम में लगे एक जूनियर अधिकारी की जिम्मेदारी तय मानी जा रही है। हालांकि इस बारे में सेना भर्ती मुख्यालय के अफसर कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।