राजधानी में एंबुलेंस की आड़ में अवैध रूप से मारुति वैन मरीजों को ढो रही हैं। संभागीय परिवहन विभाग में ऐसी एंबुलेंस का पंजीकरण तक नहीं है।
संचालक ऐसी अवैध वैन पर ट्रैक्टर एवं टैंपो के पंजीयन नंबर लिखवाकर फर्राटा भर रहे हैं। संभागीय परिवहन अधिकारियों की जांच में इसका खुलासा हुआ तो वह भौंचक्के रह गए।
यह गोरखधंधा पुलिस और संचालकों की साठगांठ से ट्रामा सेंटर के सामने धड़ल्ले से चल रहा है।
गौरतलब है कि इंदिरा भवन के सामने सोमवार को धू-धू कर जली एंबुलेंस का संभागीय परिवहन कार्यालय में निजी कार्य के लिए पंजीयन पाया गया।
इस खुलासे के बाद ‘अमर उजाला’ ने बुधवार को ट्रामा सेंटर के सामने से मरीजों को ढोने वाली 10 एंबुलेंस के पंजीयन नंबर का ब्यौरा लेकर उसकी संभागीय परिवहन कार्यालय में जांच कराई।
इसमें से आठ वैन तो एंबुलेंस में पंजीकृत पाई गईं, लेकिन दो वैन के नंबर फर्जी पाए गए। इसमें दो एंबुलेंस पर यूपी 32 बीएन सीरीज के नंबर 34....और 41....अंकित था।
जांच के दौरान पाया गया कि पहली एंबुलेंस पर अंकित नंबर टैंपो का और दूसरी का ट्रैक्टर का था।
जिस एंबुलेंस पर टैंपो का पंजीयन नंबर अंकित था उसका स्वामी पुराने लखनऊ और जिस पर ट्रैक्टर का पंजीयन नंबर अंकित उसका स्वामी रत्नाकर खंड साउथसिटी का निवासी है।
परिवहन अधिकारियों ने इस खुलासे के बाद फर्जी पंजीयन नंबर से मरीजों को ढोने वाली एंबुलेंस को दबोचने की तैयारी शुरू कर दी है।
वही दूसरी तरफ संभागीय परिवहन अधिकारी की तरफ से सोमवार को इंदिरा भवन से जली एंबुलेंस के मालिक को नोटिस जारी कर दी।