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जीएसटी के फर्जी असिस्टेंट कमिश्नर बनकर वसूली करने वाले गिरफ्तार

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लखनऊ। पीजीआई इलाके में जीएसटी के असिस्टेंट कमिश्नर बनकर ठगी करने वाले दो जालसाजों को पुलिस ने दबोच लिया। पकड़े गए जालसाजों ने एसजीपीजीआई के आसपास के इलाके की दुकानों पर अधिकारी बनकर छापा डालते थे। उनसे अवैध वसूली करते थे। पुलिस की गिरफ्त में आए दोनों जालसाज प्रयागराज के रहने वाले हैं। लखनऊ में रहकर ठगी का धंधा करते थे। पुलिस ने आरोपियों के पास फर्जी जीएसटी अधिकारी का परिचय पत्र, नीली बत्ती लगी कार, तीन मोबाइल और कई अहम कागजात बरामद किए हैं। पुलिस ने दोनों को जेल भेज दिया है।
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एडीसीपी पूर्वी एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक, पीजीआई के प्रभारी निरीक्षक आनंद प्रकाश शुक्ला व क्राइम ब्रांच की टीम ने बृहस्पतिवार को वृंदावन कॉलोनी के पास से नीली बत्ती लगी कार को रोका। कार में दो युवक सवार थे। दोनों ने खुद को जीएसटी में असिस्टेंट कमिश्नर होने का दावा किया। पुलिस ने दोनों से पहचान पत्र मांगे तो एक ने अपना परिचय पत्र दिया, जो फर्जी निकला। पुलिस ने दोनों को हिरासत में ले लिया। थाने लेकर पहुंची। वहां पूछताछ शुरू की। पकड़े गए आरोपियों में प्रयागराज के सिविल लाइन इलाके के विवेकानंद चौराहे के पास रहने वाला रितेश उपाध्याय जो पीजीआई के हिमालयन एन्क्लेव में रहता है और उसका साथी प्रयागराज के करछना स्थित बघेड़ा का रहने वाला अखंड प्रताप सिंह शामिल हैं।
अशोक स्तंभ लगा झंडा व नीली बत्ती लगाकर पूरे इलाके में करते थे वसूली
प्रभारी निरीक्षक पीजीआई आनंद प्रकाश शुक्ला के मुताबिक, दो दिन पहले कुछ दवा कारोबारियों ने शिकायत की थी। कुछ युवक अक्सर उनकी दुकान पर आकर खुद को जीएसटी का असिस्टेंट कमिश्नर बताकर दवाएं, इंजेक्शन और ऑक्सीजन सिलेंडर किसी न किसी को दिलाते हैं। युवक दुकानदारों को धमकी भी देते हैं। कुछ दुकानदारों से वसूली भी होने लगी थी। इसकी शिकायत होने पर पीजीआई और क्राइम ब्रांच की टीम ने बृहस्पतिवार को विशेष अभियान चलाया जिसमें दोनों जालसाज दबोचे गए। पुलिस ने दोनों के पास से बरामद कार पर अशोक स्तंभ, नीली बत्ती, भारत सरकार लिखा मोनो ग्राम भी बरामद किया। फर्जी जीएसटी अधिकारी का पहचान पत्र भी मिला है।
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दो दिन पहले गिरोह के चार सदस्य दबोचे गए थे
इस गिरोह के चार सदस्यों को पॉलीटेक्निक चौराहे के पास से गाजीपुर पुलिस ने दबोचा था। उनके पास से 22 रेमडेसिविर इंजेक्शन बरामद हुए थे जिसे वह मनमाने दाम पर बेचने जा रहे थे। चारों आरोपियों ने पूछताछ में रितेश उपाध्याय व अखंड प्रताप सिंह का नाम कुबूला था। गाजीपुर पुलिस भी इन दोनों की तलाश में जुटी थी। लेकिन इसके पहले ही पीजीआई और क्राइम ब्रांच की टीम ने उन्हें दबोच लिया। पुलिस अभी इस गिरोह के अन्य सदस्यों के बारे में भी जानकारी हासिल कर रही है।
पीसीएस की परीक्षा पास में नहीं हुआ तो लगा ली नीली बत्ती
पुलिस को रितेश ने बताया कि उसने दो बार पीसीएस की प्रारंभिक परीक्षा पास की लेकिन आगे सफलता नहीं मिली। इसके बाद उसने खुद को रिश्तेदारों व करीबियों के बीच पीसीएस अधिकारी होने का दावा किया और नीली बत्ती लगी गाड़ी का प्रयोग करने लगा। इसी से वह प्रयागराज भी जाता था। रितेश के पिता जल निगम में कर्मचारी हैं और फतेहपुर में तैनात हैं। रितेश पूछताछ में बताया कि इस बार फिर वह पीसीएस की परीक्षा देने जा रहा था जिसके लिए तैयारी भी कर रहा था। रितेश अपने पिता का परिचय हर किसी को एक्सईएन के रूप में देता था।
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