अभियोजन निदेशालय के अपर पुलिस महानिदेशक आशुतोष पांडेय के अनुसार, स्पूफिंग के जरिए उपभोक्ता को जिस नंबर से कॉल की जाती है। वह उसके फोन पर बैंक की हेल्पलाइन या बैंक के अधिकारी के नंबर से प्रदर्शित होता है।
कई बार उपभोक्ता गूगल से बैंक की हेल्पलाइन का नंबर तलाश कर फोन करता है तब भी वह स्पूफिंग का शिकार हो जाता है। साइबर अपराधियों ने इंटरनेट पर कई फर्जी नंबर व अकाउंट पोस्ट किए हैं। उपभोक्ता जब इन नंबरों से बैंक को कॉल करता है तो वह एटीएम अथवा खाते की जानकारी हासिल करते हैं।
अपराधी खाते अथवा एटीएम को अपडेट करने के नाम पर लिंक भेजते हैं। इस पर क्लिक करते ही खाते से रकम उड़ा दी जाती है। ऐसे मामलों में किस एप या तकनीक से रोका जा सकता है इसकी विवेचकों को जानकारी दी जा रही है।