मलिहाबाद में पुलिस अधिकारियों को जिन लोगों को जेल भेजना था, उन्हीं के साथ सरकार की महत्वाकांक्षी योजना ‘मिशन शक्ति’ के आयोजन पर वे मंच साझा करते दिखे। मामला मलिहाबाद के कुंवर आसिफ अली डिग्री कॉलेज का है जहां के प्रबंधक पर सरकारी पट्टे की जमीन पर कब्जा करने, नकली दस्तावेज बनाने, मृत व्यक्ति से कोर्ट में गवाही दिलाने और एससी-एसटी एक्ट का मुकदमा दर्ज हैं। ऐसे जालसाजों को मलिहाबाद पुलिस ने मंच पर सम्मान दिया। सवाल करने पर इंस्पेक्टर ने कहा कि मुकदमा लिखने से ही कोई आरोपी नहीं हो जाता है।
मंगलवार को मलिहाबाद पुलिस ने मिशन शक्ति के तहत कुंवर आसिफ अली डिग्री कॉलेज में वाद-विवाद प्रतियोगिता और बेटियों के लिए आत्मरक्षा कार्यक्रम का आयोजन किया था। इस कार्यक्रम में स्थानीय क्षेत्राधिकारी, इंस्पेक्टर सहित कई पुलिसकर्मी शामिल हुए। इनके साथ मंच साझा करने वालों में कैसरजहां डिग्री कॉलेज के प्रबंधक उमैर आसिफ और पूर्व प्रधान हारून आसिफ भी शामिल थे। क्षेत्र की प्रधान भी महिला हैं, उन्हें भी नहीं बुलाया गया।
हाल ही में मलिहाबाद थाने में सरकारी पट्टे की जमीन पर अवैध कब्जा करने का मुकदमा दर्ज किया गया है जिसमें कैसरजहां डिग्री कॉलेज के प्रबंधक उमैर आसिफ, कुंवर आसिफ अली डिग्री कॉलेज की प्रबंधक शबाना उर्फी और पूर्व प्रधान हारून आसिफ सहित पांच को आरोपी बनाया गया है। आरोप है कि तीनों ने मृत व्यक्ति की जगह दूसरे को खड़ा करके कोर्ट में गवाही दिलाई। इसके अलावा फर्जी तरीके से दस्तावेज तैयार कर दलित को पट्टे में दी गई जमीन को भी हड़प लिया। पीड़ित संतलाल की तहरीर पर पुलिस ने रसूखदारों के दबाव में कार्रवाई नहीं की तो उसने कोर्ट की शरण ली। कोर्ट से आदेश जारी होने के बाद मुकदमा दर्ज किया गया। मुकदमा दर्ज होने के बाद भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। वहीं उनको सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं के प्रचार-प्रसार के दौरान मंच पर सम्मान दिया जा रहा है। स्थानीय लोगों में चर्चा है कि रसूखदारों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई करने में हिचकती है।
इस संबंध में मलिहाबाद के प्रभारी निरीक्षक चिरंजीव मोहन से जब पूछा गया तो उन्होंने कहा कि मंगलवार को मिशन शक्ति के तहत कुंवर आसिफ अली डिग्री कॉलेज में कार्यक्रम का आयोजन था। स्कूल उनका था, इसलिए वह मंच पर मौजूद थे। साथ ही कहा कि मुकदमा लिखने भर से कोई आरोपी नहीं हो जाता है। विवेचना के दौरान अगर दोष सिद्घ होगा तो आरोपी कहा जाएगा। वहीं मुकदमा कोर्ट के आदेश पर दर्ज है। विवेचना के बाद ही तय होगा कि वह आरोपी हैं या नहीं।