अभिषेक सिंह ने बताया कि गिरफ्तार किए गए मनोज से जो जानकारी हासिल हुई है, उसके मुताबिक वह अपने गांव के राजन तिवारी के माध्यम से जो कि स्वंय मनोज कुमार दूबे के नाम से प्राथमिक विद्यालय गोडसीपुर रेहरा बजार बलरामपुर में सहायक अध्यापक पद पर नियुक्त है ने उसका परचिय गोरखपुर निवासी मनोज जायसवाल से 2009 में कराया था।
जिसने हमारी (मनोज यादव) की नियुक्ति फर्जी शैक्षिक प्रमाण पत्रों के आधार पर संजय यादव के नाम से बलरामपुर में करा दी। इस मामले में कई और लोगों के फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी करने की जानकारी मिली है, जिसके बारे में एसटीएफ पड़ताल कर रही है। बृहस्पतिवार को गिरफ्तार किए गए अभियुक्तों को बलरामपुर में ही संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर दाखिल कर दिया गया है।
उधर, बलरामपुर में बेसिक शिक्षा कार्यालय के वरिष्ठ सहायक रक्षा राम ने बताया कि 2008 में डायट से विशिष्ट बीटीसी सामान्य से छह माह की ट्रेनिंग के बाद प्राथमिक स्कूलों में सौरभ पांडेय, मनोज कुमार दूबे, शशिकेष तिवारी, संजय यादव व जीवन ज्योति को तैनात किया गया था।
वर्तमान में इन सभी शिक्षकों को शिक्षा क्षेत्र पचपेड़वा के स्कूलों में इनकी तैनाती थी। रक्षा राम का दावा है कि विभाग ने पहले ही संजय यादव व अभिषेक सिंह को बर्खास्त करके एफआईआर दर्ज करा दी थी। जबकि मनोज कुमार दूबे ने त्याग पत्र दे चुका है। सौरभ पांडेय व शशिकेश तिवारी का वेतन रोक कर विभागीय जांच की जा रही है।