डॉ. एसएन शुक्ला व डॉ. ज्ञान प्रकाश गुप्ता
- फोटो : amar ujala
राजनीति-समाज में शुचिता लाने की लड़ रहे लड़ाई
डॉ. एसएन शुक्ला, सेवानिवृत्त आईएएस अफसर
निराला नगर निवासी 1967 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. एसएन शुक्ला 2003 में सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद से राजनीति व समाज में शुचिता लाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। इसके लिए कई सेवानिवृत्त नौकरशाहों ने वर्ष 2003 में लोक प्रहरी संस्था का गठन किया। पिछले महीने ही उनकी याचिका पर सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बैंच ने पूर्व मुख्यमंत्रियों को ताउम्र बंगले आवंटित करने को अवैध ठहराया था। इस फैसले का देशव्यापी असर हो रहा है। उन्हीं की याचिका पर शीर्ष अदालत ने 2013 में सांसदों व विधायकों को तीन साल से ज्यादा की सजा होते ही सदस्यता से अयोग्य घोषित किए जाने का आदेश दिया।
महज 10 रुपये में गरीब मरीजों को दवा, 150 मरीज रोजाना देखते हैं
डॉ. ज्ञान प्रकाश गुप्ता
सआदतगंज निवासी डॉ. ज्ञान प्रकाश गुप्ता ने वर्ष 1955 में किंग जॉर्ज मेडिकल कॉलेज जॉइन किया और 1992 में वहीं से प्रोफेसर एवं फार्माकोलॉजी के विभागाध्यक्ष पद से सेवानिवृत्त हुए। अपने कार्यकाल में उन्होंने मैनुअल में गरीब मरीजों के प्रेसक्रिप्शन का चैप्टर जुड़वाया था। गरीबों मरीजों को सस्ते प्रेसक्रिप्शन के लिए स्टूडेंट्स की क्लास भी लेते थे। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने सआदतगंज में ही गरीब मरीजों का इलाज शुरू किया। उनके क्लीनिक में 10 रुपये में पर्चा बनता है और इसी में वह मरीजों को दवाइयां भी देते हैं। 86 साल की उम्र में भी वह प्रतिदिन करीब 150 गरीब मरीजों का इलाज करते हैं। इलाके में उन्हें डॉ. ज्ञानू के नाम से भी जाना जाता है।
डॉ. मंदाकिनी प्रधान व कमला श्रीवास्तव
- फोटो : amar ujala
कोख में ही भ्रूण के इलाज में महारत हासिल है इन्हें
डॉ. मंदाकिनी प्रधान, महिला एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ
डॉ. मंदाकिनी प्रधान संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के डिपार्टमेंट ऑफ मैटरनल हेल्थ की प्रमुख हैं। प्रधान देश के उन चुनिंदा डॉक्टरों में हैं जिन्हें गर्भ में ही भ्रूण के इलाज में महारत हासिल है। डॉ. प्रधान का विभाग अब तक 1000 से अधिक शिशुओं की जान बचा चुका है। यह इन्हीं के प्रयासों का परिणाम था कि विभाग ने 2012 में मैटरनल एंड फीटल मेडिसिन में एक साल का डिप्लोमा कोर्स शुरू हुआ। उन्होंने भ्रूण में घेंघा जैसी बीमारियों का सफलतापूर्वक इलाज करके एसजीपीजीआई को देश में अलग पहचान दिलाई। उन्होंने ही एक खास विधि से भ्रूण को गोली खिलाकर इलाज करने की तकनीक विकसित की। ब्लड कैंसर पीड़ित गर्भवती के गर्भस्थ शिशु को ब्लड ट्रांसफ्यूजन के जरिए मां की बीमारी के प्रभाव से बचाकर सुरक्षित प्रसव कराकर पीजीआई के रिकॉर्ड में एक और उपलब्धि जोड़ी।
इनके लोकगीतों में आती है गांवों की मिट्टी की खुशबू
कमला श्रीवास्तव, गायिका
वरिष्ठ गायिका कमला श्रीवास्तव अवध की विविधरंगी ग्रामीण संस्कृति की प्रतिनिधि लोक गायिका हैं। अपनी दीर्घकालीन संगीत यात्रा में वे भातखंडे संगीत संस्थान सम विश्वविद्यालय से भी लंबे समय से जुड़ी रही हैं। उनके शिष्य-शिष्याओं में मालिनी अवस्थी जैसे प्रतिष्ठित कलाकार शामिल हैं। यश भारती, सरस्वती सहित कई सम्मान से विभूषित कमला श्रीवास्तव ने विभिन्न नृत्य नाटिकाओं का संगीत निर्देशन करने के साथ-साथ मूर्धन्य संगीतविदों का आकाशवाणी व दूरदर्शन पर साक्षात्कार भी लिया है। लोक गीतों पर आधारित ‘विवाह गीत’, ‘फुहार’ अलबम को काफी लोकप्रियता मिली है।
प्रो. भूमित्र देव, विलायत जाफरी व जस्टिस हैदर अब्बास रजा
- फोटो : amar ujala
शिक्षा व्यवस्था में सुधार लाए
प्रो. भूमित्र देव, पूर्व कुलपति
शिक्षा व्यवस्था में सुधार की बात हो तो प्रोफेसर भूमित्र देव का जिक्र लाजिमी है। वे चार विश्वविद्यालयों में छह बार कुलपति का दायित्व निभा चुके हैं। देश-विदेश के छह विश्वविद्यालयों में 39 साल का शोध और टीचिंग का लंबा अनुभव है। उन्हें पांच भारतीय और 6 विदेशी स्कॉलरशिप के लिए चुना गया। देश और विदेश में अब तक 75 रिसर्च पेपर छप चुके हैं। 21 विद्यार्थी आपके अधीन शोध करके पीएचडी कर चुके हैं। प्रो. भूमित्र देव को हिंदी संस्थान द्वारा भगवान दास पुरस्कार, ऑल इंडिया जूलोजी कांग्रेस द्वारा लाइफ टाइम एचीवमेंट अवार्ड, विज्ञान रत्न, अवध गौरव सम्मान, कबीर दीप सम्मान समेत कई सम्मानों से नवाजा जा चुका है।
विलायत जाफरी, दूरदर्शन के पूर्व निदेशक व वरिष्ठ रंगकर्मी
रायबरेली के प्रतिष्ठित परिवार से ताल्लुक रखने वाले विलायत जाफरी का शुरुआती दौर हबीब तनवीर के साथ गुजरा। दिल्ली में दोनों एक ही कमरे में रहा करते थे। जाफरी ने चोकोस्लाविया के टीवी फेस्टिवल में इंटरनेशनल ज्यूरी के तौर पर हिस्सा लिया। नेशनल फिल्म डवलपमेंट कॉरपोरेशन की स्क्रिप्ट कमेटी व थियेटर ऑफ इंडिया काउंसिल फॉर कल्चरल रिलेशन के पैनल मेंबर के तौर पर भी सक्रिय रहे। अब तक 9 किताबें प्रकाशित हो चुकी हैं। विलायत जाफरी ने 1974 में रेजीडेंसी में एक लाइट एंड साउंड शो कराया, जिसे लोग आज तक याद करते हैं। वहीं 1998 में राजभवन में पहली बार राजभवन में एक नाटक ‘शतरंज के मोहरे’ का मंचन कराया। केंद्र और प्रदेश सरकार से उर्दू अकादमी पुरस्कार, गृह मंत्रालय ने कम्युनल हारमोनी अवार्ड, संगीत नाटक अकादमी अवार्ड, अकादमी रत्न समेत तमाम पुरस्कार आपकी झोली में है।
जस्टिस हैदर अब्बास रजा
हाईकोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश और उत्तराखंड के लोकायुक्त का पद सुशोभित कर चुके हैं। तमाम एतिहासिक फैसले देने वाले हैदर अब्बास साहब साहित्य के क्षेत्र में भी बहुत सक्रिय हैं।
शेरो शायरी से आपको बहुत मोहब्बत है। मशहूर शायर मजाज के आखिरी मुशायरे के भी आप गवाह रहे हैं। न्यायिक सेवा में राम जन्म भूमि और बाबरी मस्जिद विवाद में स्थापित स्पेशल बेंच में भी जस्टिस हैदर अब्बास शामिल थे।