लखनऊ के इकदुनिया गांव की रहने वाली सोनी का कहना है कि कुछ माह से इस तरह का चावल मिल रहा है, यह प्लास्टिक जैसा दिखता है। वह कोटे की दुकान से चावल लाने के बाद ऐसे दाने को चुनकर फेंक देती हैं। इसके बाद उसे पकाती हैं। उनका कहना है कि उनके गांव सभी लोग ऐसा ही करते हैं।
लोगों को समझाने का कर रहे प्रयास
कोटेदार मो. सबरेज का कहना है कि एक व्यक्ति एसडीएम के पास चावल लेकर पहुंच गया। वहां से खाद्य निरीक्षक को जांच करने के लिए भेजा गया। इसके बाद उपभोक्ता को समझाया गया कि यह फोर्टिफाइड चावल है। इसके फायदे भी बताए गए। दुकान पर अब एक बोर्ड भी लगा दिया है, जिससे लोग इस चावल को खाने से परहेज न करें।
लोगों को किया जा रहा जागरूक
लखनऊ के जिला खाद्य विपणन अधिकारी निश्चल आनंद का कहना है कि हर कोटेदार को वीडियो और पोस्टर के जरिये लोगों को जागरूक करने के लिए कहा गया है। खाद्य निरीक्षकों के अलावा विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थानीय इकाइयां भी यह काम कर रही हैं। शिकायत मिलने पर मौके पर जाकर सही तथ्य बताया जा रहा है। लोगों को समझना होगा कि यह उनके अच्छी सेहत के लिए जरूरी है।