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एसजीपीजीआई के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष व मशहूर वायरोलॉजिस्ट डॉ. टीएन ढोल कोरोना से हारे

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एसजीपीजीआई के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष व मशहूर वायरोलॉजिस्ट डॉ. टीएन ढोल कोरोना से हारे
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एसजीपीजीआई के माइक्रोबायोलॉजी विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. टीएन ढोल (62) कोरोना से जिंदगी की जंग हार गए। देश के मशहूर वायरोलॉजिस्ट डॉ. ढोल को चिकित्सा संस्थानों में माइक्रोबायोलॉजी को स्वतंत्र विभाग के रूप में स्थापित करने का श्रेय जाता है।
उन्होंने मंगलवार देर रात पीजीआई के राजधानी कोविड अस्पताल में अंतिम सांस ली। डॉ. टीएन ढोल चार सितंबर को वायरस की चपेट में आए थे। बुखार के साथ सांस लेने में तकलीफ होने पर उन्हें एसजीपीजीआई में भर्ती कराया गया।
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रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर वह कोविड हॉस्पिटल की आईसीयू में भर्ती हुए। तमाम प्रयास के बाद भी उनके फेफड़े का संक्रमण नहीं रुका। निमोनिया के साथ फेफड़े में सिकुड़न बढ़ जाने से उन्हें वेंटिलेटर पर रखा गया।
एसजीपीजीआई की पूरी टीम उनकी निगरानी में लगी रही, लेकिन उनकी जान बचाने में सफलता नहीं मिली। डॉ. ढोल पीजीआई एचआरएफ के अध्यक्ष भी रह चुके हैं।
माइक्रोबायोलॉजी विभाग का अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने प्रदेश में वायरस की जांच को अलग से इंस्टीट्यूट बनाने का प्रस्ताव तैयार किया था। हालांकि, यह परवान नहीं चढ़ पाया। वायरस के विभिन्न पहलू की खोज के लिए उन्हें दुनिया भर में पहचान मिली।
कई वायरस की जांच तकनीक विकसित की
डॉ. ढोल ने पोलियो, जपानी इंसेफेलाइटिस, स्वाइन फ्लू वायरस की जांच की तकनीक विकसित की। उनके निदेशन में शोध करने वाले वायरोलॉजिस्ट केजीएमयू, पीजीआई, लोहिया संस्थान के अलावा देशभर के चिकित्सा संस्थानों में हैं। उन्होंने प्रदेश का पहला पोलियो जांच केंद्र डब्ल्यूएचओ के सहयोग से पीजीआई में स्थापित किया। उन्होंने पोलियो उन्मूलन के लिए वर्ष 1998 में प्रोजेक्ट शुरू किया, जो आज भी चल रहा है। इसके अलावा डॉ. ढोल ने जापानी इंसेफेलाइटिस वायरस के जांच की सुविधा पीजीआई में शुरू की और फिर इसका विस्तार किया। उनके परिवार में पत्नी के अलावा बेटा और एक बेटी है।
पीजीआई की नींव से जुड़े थे
डॉ. ढोल ने वर्ष 1988 में पीजीआई ज्वाइन किया था। महाराष्ट्र के डॉ. ढोल का जन्म नवंबर 1953 में हुआ था। उन्होंने महाराष्ट्र से 1979 में एमबीबीएस और 1982 में एमडी (माइक्रोबायोलॉजी) किया था। वे पीजीआई से सेवानिवृत्त हो चुके हैं।
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389 शोधपत्र हो चुके हैं प्रकाशित
डॉ. ढोल के 389 शोधपत्र इंटरनेशनल मेडिकल जर्नल में प्रकाशित हो चुके हैं। तमाम छात्रों के गाइड रह चुके हैं। पीजीआई के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की प्रमुख डॉ. उज्जवला घोषाल और केजीएमयू के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की डॉ. शीतल वर्मा कहती हैं कि डॉ. ढोल ने उन्हें पढ़ाया है। उनका असमय जाना माइक्रोबायोलॉजी चिकित्सा विज्ञान के लिए बड़ी क्षति है। एसजीपीजीआई के निदेशक प्रो. आरके धीमान ने श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि संस्थान ने एक मार्गदर्शक खो दिया है।
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