सेना के एक पूर्व नि:शक्त जवान ने करीब 15 साल चली कानूनी जंग जीत ली। हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने याची पूर्व सैनिक को सेना से डिस्चार्ज किए जाने की तारीख से विकलांगता पेंशन समेत एरियर का भुगतान तीन माह में किए जाने के निर्देश केंद्र सरकार को दिए हैं।
न्यायमूर्ति राजीव शर्मा और न्यायमूर्ति महेंद्र दयाल की खंडपीठ ने यह सुरक्षित फैसला केंद्र सरकार व अन्य की तरफ से दायर विशेष अपील को खारिज कर सुनाया। इसमें एकल न्यायाधीश की अदालत के फैसले को चुनौती दी गई थी।
दो न्यायाधीशों की खंडपीठ ने एकल पीठ के फैसले पर मुहर लगाते हुए कहा कि अपीलकर्ता (केंद्र सरकार व अन्य) एकल न्यायाधीश के निर्देश मानने को बाध्य हैं। अदालत ने कहा कि यह साबित करने वाला कोई रिकॉर्ड नहीं है कि सेना में भर्ती होते समय इस जवान को किसी तरह की बीमारी थी।