शिक्षण संस्थान 15 दिन में बनाएं एंटी रैगिंग कमेटी
लखनऊ। नए शैक्षिक सत्र की शुरुआत के साथ ही उच्च शिक्षण संस्थानों में रैगिंग के नाम पर नए प्रवेशार्थियों का उत्पीड़न रोकने की कवायद प्रशासन ने शुरू कर दी है। राजधानी में इंजीनियरिंग, मेडिकल और पैरामेडिकल शिक्षण संस्थाओं के साथ ही सभी विश्वविद्यालयों व डिग्री कालेजों को 15 दिन के अंदर एंटी रैगिंग कमेटी गठित करने का निर्देश जारी किया गया है। यह जानकारी जिलाधिकारी कौशल राज शर्मा ने बृहस्पतिवार को दी। उन्होंने चेताया है कि रैगिंग का मामला मिलने पर शिक्षण संस्थान के प्रबंधक व प्राचार्य को जिम्मेदार मान कार्रवाई के घेरे में लाया जाएगा।
क्षेत्रवार बनेगा एंटी रैंगिग सेल
जिला प्रशासन एसीएम व एसडीएम की अध्यक्षता में क्षेत्रवार एंटी रैंगिग सेल गठित करेगा। इसका प्रभारी अधिकारी एडीएम सिटी ट्रांसगोमती अनिल कुमार को बनाया गया है। इनकी निगरानी में गठित होने वाली एंटी रैगिंग सेल में क्षेत्रीय एसीएम के साथ ही संबंधित सीओ व कॉलेज प्रशासन की तरफ से नामित वरिष्ठ शिक्षक व प्रॉक्टर शामिल होंगे। यह सेल शिक्षण संस्थाओं के परिसर, क्लास रूम व हॉस्टल का औचक निरीक्षण कर नए प्रवेशार्थियों से बातचीत के आधार पर रैगिंग की आड़ में होने वाले उत्पीड़न का पता लगाएगा। रैगिंग की श्रेणी में हर छोटी-बड़ी बातें शामिल होंगी जो किसी भी नए प्रवेशार्थी को रंग, धर्म, जाति, लैंगिक प्रवृत्ति क्षेत्रीय मूल भाषा या आर्थिक आधार पर शारीरिक या मानसिक प्रताड़ना पहुंचाएगी। कॉलेज प्रबंधन व प्राचार्य की जिम्मेदारी होगी कि रैगिंग से जुड़े मामलों को सेल के समक्ष लाकर दोषियों की धरपकड़ कराएं।
संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी से निगरानी
जिलाधिकारी ने कहा कि रैगिंग रोकने की प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन की है। सभी शिक्षण संस्थाओं को परिसर में रैगिंग के लिहाज से संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरा लगाना अनिवार्य किया गया है। कॉलेज कैंटीन, क्लास रूम तक पहुंचने के रास्तों, पुस्तकालयों, कॉरिडोर और प्रवेश द्वार पर हर नए व पुराने विद्यार्थियों की गतिविधियों पर नजर रखी जाए। इसके लिए सभी शिक्षण संस्थानों के प्रबंधन को 15 दिनों में सीसीटीवी निगरानी से जुड़ी फोटोयुक्त स्थलीय रिपोर्ट तैयार भी प्रशासन को देने के लिए कहा गया है।
रैगिंग हेल्पलाइन नंबर प्रदर्शित करना भी जरूरी
रैगिंग की श्रेणी में आने वाली किसी भी घटना को छोटा बड़ा न मानते हुए तत्काल प्रथम सूचना रिपोर्ट दर्ज कराने का कार्य भी कराया जाए। शिक्षण संस्थाएं व विवि रैगिंग की शिकायत दर्ज कराने को हेल्पलाइन नंबर जारी कर इसे सार्वजनिक तौर पर प्रचारित कराएं। शैक्षिक संस्थाओं में रैंगिग प्रतिबंध अधिनियम 2010 के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई के संबंध में गठित जिला स्तरीय कमेटी के माध्यम से भी शिक्षण संस्थानों में नए विद्यार्थियों को रैगिंग से बचने और वरिष्ठ छात्रों को रैगिंग में लिप्त पाए जाने पर मिलने वाले दंड के बारे में जानकारी दी जाए।
अभिभावकों से भी भरवाए जाएंगे शपथपत्र
प्रवेश के समय ही रैगिंग रोकने को हर सीनियर छात्र के अभिभावक से भी शपथ पत्र भरवाया जाए कि अगर उनका लड़का रैगिंग जैसे किसी कृत्य में लिप्त पाया जाता है तो उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के साथ सीधे निष्कासन की कार्रवाई तय होगी। साथ ही शैक्षणिक सत्र के शुरुआती तीन माह में रैगिंग की रोकथाम के लिए विशेषतौर पर सतर्कता बरतते हुए नए प्रवेशार्थियों के हॉस्टल व कैंटीन में रात आठ बजे से सुबह आठ बजे तक सीनियर छात्र-छात्राओं का प्रवेश भी सख्ती से प्रतिबंधित कर वार्डन स्तर पर इसकी निगरानी सुनिश्चित कराने को कहा गया है।