सावधान शहर में फर्जी शस्त्र लाइसेंस बनाने का धंधा भी चल रहा है। डीएम के जाली हस्ताक्षर के सहारे न केवल लाइसेंस जारी किया गया बल्कि इसी लाइसेंस पर डबल बैरल बंदूक व रिवाल्वर भी खरीद लिया गया।
दो साल पहले कलेक्ट्रेट से तीन शहरवासियों के नाम पर जारी फर्जी शस्त्र लाइसेंस का भंडाफोड़ होने के बाद कलेक्ट्रेट शस्त्र अनुभाग में हड़कंप है।
इनका खुलासा तब हुआ जब इनमें से दो लाइसेंस धारकों ने दिल्ली में नवीनीकरण कराना चाहा। वहीं एक अन्य ने कोयम्बटूर में फर्जी लाइसेंस से खरीदी गई डीबीएल के सहारे एक सिक्योरिटी एजेंसी में नौकरी करनी चाही।
उक्त तीनों शस्त्र लाइसेंसों के सत्यापन की रिपोर्ट शस्त्र अनुभाग से मांगे जाने पर जांच हुई तो पता चला कि उक्त नंबर का कोई लाइसेंस कभी जारी ही नहीं किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए शस्त्र प्रभारी व सिटी मजिस्ट्रेट पीपी पाल ने तीनों ही मामलों की जानकारी डीएम को देते हुए एसएसपी से फर्जीवाड़े के आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा है।
जानकारी के अनुसार बीते वर्ष 2013 में नवंबर से दिसंबर माह के पहले सप्ताह के बीच कलेक्ट्रेट स्थित शस्त्र अनुभाग से जारी दर्शाए गए तीन शस्त्र लाइसेंसों की सत्यापन रिपोर्ट वेरीफिकेशन के लिए कोयम्बटूर व नई दिल्ली के पुलिस अधिकारियों की तरफ से मांगी गई थी।
शस्त्र प्रभारी व सिटी मजिस्ट्रेट ने जब संबंधित नंबर से जारी उक्त तीनों शस्त्र लाइसेंसों की अभिलेखीय जांच करवायी तो पता चला कि उक्त नंबर पर संबंधित व्यक्तियों के नाम कोई शस्त्र लाइसेंस जारी ही नहीं हुआ है।
वहीं, फर्जी शस्त्र लाइसेंस में तीन मामलों का खुलासा नई दिल्ली पुलिस की ओर से लाइसेंस नवीनीकरण के आवेदन की सत्यापन रिपोर्ट मांगे जाने पर हुआ।
इसमें दो शस्त्र लाइसेंस सतवीर सिंह एफ 148 इंद्रलोक कॉलोनी कृष्णानगर के पते पर थाना कृष्णानगर से जारी दर्शाए गए थे।
फर्जी शस्त्र लाइसेंसों पर एफजी 27171 .32 बोर पिस्टल व 0742-09778 नंबर की .315 रायफल खरीद कर ली। चौथे मामले में शिव कुमार निवासी 238-158 गोलागंज के पते पर वजीरगंज थाना से शस्त्र लाइसेंस नंबर 4033 जारी हुआ। यह भी जांच रिपोर्ट में फर्जी पाया।