स्मारक घोटाले की जांच कर रही विजिलेंस को जहां कुछ अहम दस्तावेज मिले हैं। वहीं कई महत्वपूर्ण मामलों से जुड़ी मूल फाइलें नहीं मिल पा रही हैं।
इसी वजह से विजिलेंस की टीम को गुरुवार को भी राजकीय निर्माण निगम के कार्यालय पहुंचना पड़ा।
विजिलेंस फिलहाल पहले पूर्व मंत्री बाबू सिंह कुशवाहा के नजदीकी रहे अधिकारी सुहैल अहमद फारूकी से पूछताछ करने की तैयारी में है।
विजिलेंस के सूत्रों के अनुसार जिस तरह फारूकी ने खनन विभाग का संयुक्त निदेशक रहते हुए और रिटायर होने के बाद वहीं सलाहकार की हैसियत में स्मारकों के निर्माण के लिए पत्थर का चयन और उसके खनन, एज कटिंग, मोल्डिंग व परिवहन से संबंधित फैसलों को किया।
विजिलेंस ने फारूकी की विभाग में दोबारा तैनाती के आदेश तो हासिल किए ही हैं, उनके द्वारा कुछ अहम फैसलों को लेने के लिए जो मीटिंग आदि की गई, उससे जुड़े दस्तावेज भी तलाशे हैं।
दूसरी ओर विजिलेंस को स्मारकों के निर्माण के लिए दिए गए विभिन्न ठेकों और उनके भुगतान से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण फाइलें नहीं मिल रही हैं।
विजिलेंस अफसरों ने स्मारक निर्माण से जुड़े सभी विभागों, जैसे राजकीय निर्माण निगम, लोक निर्माण विभाग, लखनऊ विकास प्राधिकरण, नोएडा विकास प्राधिकरण , भूतत्व एवं खनिकर्म विभाग आदि से निर्माण एवं ठेकों से संबंधित सभी कामों की फाइलें मांगी थी।
चूंकि राजकीय निर्माण निगम इस काम की नोडल एजेंसी थी, इसलिए निगम के जरिए ही अधिकतर आदेश व भुगतान जारी हुए।
फारूकी समेत कुछ अन्य अभियंताओं व तत्कालीन परियोजना निदेशक व अपर परियोजना निदेशकों के बारे में विजिलेंस को जो दस्तावेज हासिल हुए हैं, उनके आधार पर विजिलेंस जल्दी ही पूछताछ का सिलसिला शुरू करेगी।