इन बिंदुओं पर फोरेसिंक टीम ने की पड़ताल
सुल्तानपुर खेड़ा गांव के मोड़ के पास वाहनों के बने स्क्रेच जांचे।
वाहनों के टूटे हुए कांच व अन्य सामान के प्रिंट लिए।
घटना के दौरान ट्रक और कार (स्विफ्ट) की रफ्तार कितनी थी।
दोनों वाहनों की जांच की और उसमें मिली सामग्री को कब्जे में लिया।
हाईवे स्थित घटनास्थल से 200 मीटर दूरी तक फीते से नापजोख की।
दुर्घटनाग्रस्त कार से हाईवे तक नौ मीटर की फीते से भी नापजोख की।
नापजोख के बाद हाईवे स्थित घटनास्थल पर लाल रंग के निशान लगाए।
स्थानीय फोरेंसिक टीम ने जांच में किया सहयोग
लखनऊ से आई फोरेंसिक टीम का स्थानीय फोरेंसिक टीम ने जांच में सहयोग किया। रायबरेली की फोरेंसिक प्रभारी प्रतिभा त्रिपाठी, अजीत, प्रवण भी घटना के दूसरे दिन भी घटनास्थल पर पहुंचे। स्थानीय टीम ने लखनऊ से आए वैज्ञानिक अधिकारियों को घटना के बारे में अवगत कराया।
बोला चश्मदीद, बहुत स्पीड में थी गाड़ी
जिस समय हादसा हुआ, उस समय पूरे दौली मजरे सुल्तानपुरखेड़ा गांव के रहने वाले गया प्रसाद हाईवे स्थित अपनी किराना की दुकान पर बैठा था। लखनऊ से आई फोरेंसिक टीम ने गया प्रसाद से भी घटना के बारे में पूछताछ की। इस पर गया प्रसाद ने बताया कि ट्रक की स्पीड बहुत तेज थी। ट्रक अपनी दिशा से दाहिने ओर जाकर सामने से आ रही कार को टक्कर मारी थी। टक्कर मारने के बाद ट्रक बीच रोड में जाकर खड़ा हो गया। हादसे में कार सवार लोगों की गलती नहीं थी। उसकी रफ्तार कुछ धीमी थी।