हाईकोर्ट ने कहा है कि भारत में व्यवसाय कर रही विदेशी कंपनियां जिन्होंने स्थायी रूप से निवेश किया है वे आयकर के दायरे में आएंगी।
कोर्ट ने आयकर विभाग द्वारा आयकर अधिनियम की धारा 148 के तहत जारी नोटिस को भी सही करार दिया है। कोर्ट ने इस परिपेक्ष्य में दक्षिण कोरिया की कंपनी एलजी इलेक्ट्रानिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड द्वारा दाखिल दर्जनों याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा कि कंपनी को भारत में व्यवसाय करने से होने वाली आमदनी आयकर के दायरे में आएगी।
कोर्ट ने इस आधार पर दिया फैसला
याचिकाओं में आयकर अधिनियम की धारा 148 के तहत जारी नोटिस को चुनौती दी गई थी। इस पर सुनवाई कर रही न्यायमूर्ति तरुण अग्रवाल और दिनेश गुप्ता की खंडपीठ ने कहा कि आयकर विभाग के मूल्यांकन अधिकारी ने यदि यह निष्कर्ष निकाला है कि कंपनी का भारत में स्थायी प्रतिष्ठान है और वह इससे व्यवसाय कर रही है तो यह आयकर निर्धारण के लिए पर्याप्त आधार है।
कंपनी लाभ कमाने के इरादे से व्यवसाय कर रही है तो वह आयकर से बचने के लिए दोहरे कर का आधार नहीं ले सकती है।
छूट पाने के लिए यह साबित करना होगा
खंडपीठ ने कहा कि यदि कंपनी यह साबित कर दे कि भारत में उसके द्वारा नियंत्रित कंपनी और मूल कंपनी द्वारा किया जा रहा लेनदेन समान है तो उसे अतिरिक्त कर नहीं देना पड़ेगा किंतु यदि उनके लेनदेन में भिन्नता है तो आयकर देना होगा।
एलजी इलेक्ट्रानिक्स इंडिया प्राइवेट लिमिटेड ने वर्ष 2004-05 में आयकर रिटर्न दाखिल नहीं किया था। मूल्यांकन अधिकारी ने पाया कि मूल कंपनी द्वारा नियंत्रित कंपनी के माध्यम से भारत में व्यवसाय किया जा रहा है। मामला करीब 1400 करोड़ रुपये के कर का है जिसके लिए धारा 148 का नोटिस जारी किया गया।