लखनऊ। शराब दुकान, रेस्टोरेंट, क्लीनिक या अस्पताल चलाने वाले जिन लोगों ने बीते साल नगर निगम में लाइसेंस शुल्क नहीं जमा किया था, ऐसे लोगों से नगर निगम अब दो साल का शुल्क वसूल करेगा। यह पहली बार होगा। यह निर्णय बुधवार को अपर नगर आयुक्त अरुण गुप्ता की अध्यक्षता में हुई बैठक में लिया गया। अभी तक चालू वित्तीय वर्ष के ही लाइसेंस शुल्क वसूली पर जोर रहता था। लाइसेंस एक साल का होता है। ऐसे में शराब की दुकान व कुछ अन्य प्रतिष्ठानों का लाइसेंस शुल्क साल बीतने के बाद लैप्स हो जाता था।
नगर निगम में बुधवार को लाइसेंस विभाग के कामकाज की समीक्षा हुई। इसमें बीते साल और इस साल की समीक्षा के अलावा उन लोगों की जानकारी मांगी गई, जिन्होंने बीते साल लाइसेंस नहीं बनवाया था। अब ऐसे प्रतिष्ठान वालों से दो साल का शुल्क वसूल करने का प्रस्ताव पास किया। जिन प्रतिष्ठानों ने लाइसेंस नहीं बनवाया है, उन्हें तीन दिन का नोटिस जारी किया जाएगार। इसके साथ यह भी तय किया गया है कि इसकी शतप्रतिशत वसूली 31 मई तक की जाएगी। बैठक में मुख्य कर निर्धारण अधिकारी विनय कुमार राय ने जमा शुल्क की पूरी जानकारी ऑनलाइन अपडेट करने पर जोर दिया। समीक्षा बैठक में कई राजस्व निरीक्षक अनुपस्थित पाए गए। इस पर अपर नगर आयुक्त ने अनुपस्थित निरीक्षकों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।