लखनऊ। लखनऊ विश्वविद्यालय की कार्य परिषद की बैठक शुक्रवार को कुलपति जेपी सैनी की अध्यक्षता में प्रशासनिक भवन स्थित मंथन हॉल में हुई। विवि के शैक्षणिक विकास, शोध प्रशासन, शिक्षक हित, पाठ्यक्रम सुधार और संस्थागत सुदृढ़ीकरण से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। विवि के 105 वर्ष के इतिहास में पहली बार एक साथ 169 शिक्षकों की पदोन्नति मिली। इनमें 56 वरिष्ठ आचार्य, 54 आचार्य, 15 सह आचार्य और 44 सहायक आचार्य शामिल हैं।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे शैक्षणिक गुणवत्ता और शिक्षक कल्याण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। इसके अलावा बैठक में विश्वविद्यालय से संबद्ध 25 महाविद्यालयों में संचालित 45 पाठ्यक्रमों को अनुमोदन प्रदान किया गया। कार्य परिषद ने शोध एवं संस्थागत परियोजनाओं के संचालन के लिए परियोजना क्रियान्वयन और निधि प्रबंधन की मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करने का निर्णय लिया। इससे परियोजनाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी और वित्तीय अनुशासन सुनिश्चित होगा। साथ ही विवि ने कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) सहयोग के लिए नई गाइडलाइन भी स्वीकृत की, जिसके तहत उद्योग, पूर्व छात्र और अन्य संस्थाएं छात्रवृत्ति, शोध, नवाचार, स्टार्टअप और आधारभूत संरचना विकास में सहयोग किया जा सकेगा।
अध्ययन मंडल में दो पूर्व छात्र व दो विद्यार्थी
विभागीय अध्ययन मंडलों की संरचना में बदलाव करते हुए दो पूर्व छात्र, दो विद्यार्थियों और एक उद्योग प्रतिनिधि को विशेष आमंत्रित सदस्य के रूप में शामिल करने का निर्णय लिया गया। इसका उद्देश्य पाठ्यक्रमों को अधिक रोजगारोन्मुख और उद्योग की जरूरतों के अनुरूप बनाना है। इससे पाठ्यक्रमों में उद्योग और विद्यार्थियों की जरूरतों को बेहतर ढंग से शामिल किया जा सकेगा।