राजधानी में पहली बार सद्गुरु के साथ योग व साधना का महासत्संग
लखनऊ। राजधानी लखनऊ एक ऐतिहासिक आध्यात्मिक आयोजन का साक्षी बनने जा रहा है। योगी, आध्यात्मिक गुरु और ईशा फाउंडेशन के संस्थापक सद्गुरु पहली बार एक मार्च को मान्यवर कांशीराम स्मृति उपवन में भव्य महा-सत्संग का संचालन करेंगे। इसमें 10 हजार से अधिक साधकों की सहभागिता प्रस्तावित है। आयोजन उन प्रतिभागियों के लिए है, जिन्होंने इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रम पूर्ण कर शांभवी महामुद्रा क्रिया में दीक्षा प्राप्त की है।
यह महा-सत्संग ''इनर इंजीनियरिंग वेव ऑफ ब्लिस'' (आनंद लहर) पहल का समापन कार्यक्रम है। अक्तूबर से फरवरी तक चली इस पांच माह की पहल के तहत लखनऊ, कानपुर, नोएडा, काशी और प्रयागराज सहित प्रदेश के प्रमुख शहरों में हजारों लोगों ने सहभागिता की। रक्षा कर्मियों, सरकारी अधिकारियों, छात्रों, चिकित्सकों, कॉर्पोरेट कर्मचारियों और गृहिणियों तक इस कार्यक्रम की व्यापक पहुंच रही।
सद्गुरु की ओर से विकसित इनर इंजीनियरिंग कार्यक्रम जीवन को संतुलित और जागरूक ढंग से जीने की योगिक विधा है। इसमें सरल अभ्यासों और जीवन-दृष्टि के जरिये शारीरिक स्वास्थ्य, मानसिक स्पष्टता और भावनात्मक स्थिरता को सुदृढ़ करने पर बल दिया जाता है। इसका मुख्य अभ्यास 21 मिनट की शांभवी महामुद्रा क्रिया है, जिसे शरीर, मन और ऊर्जा प्रणाली में सामंजस्य स्थापित करने का प्रभावी माध्यम माना जाता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुए अध्ययनों में इससे तनाव, चिंता और अवसाद में कमी जैसे सकारात्मक परिणाम सामने आए हैं।
सद्गुरु के लखनऊ आगमन से पूर्व ईशा फाउंडेशन के स्वयंसेवकों ने शहर के स्कूलों, कॉलेजों, अस्पतालों और सुरक्षा संस्थानों में निशुल्क योग-ध्यान सत्र आयोजित किए, जिनमें 50 हजार से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। लखनऊ में होने वाला यह महा-सत्संग उत्तर भारत में शांभवी महामुद्रा साधकों का सबसे बड़ा संगम माना जा रहा है, जो प्रदेश में आध्यात्मिक चेतना के विस्तार का महत्वपूर्ण अध्याय सिद्ध होगा।