आंगनबाड़ी केंद्रों में हॉट कुक्ड फूड एनजीओ को देने की तैयारी है। सहारनपुर व संभल में योजना की सफलता के बाद सरकार ने यह फैसला किया है।
इसके लिए नियम व शर्तें भी तय कर दिए गए हैं। जिलों में डीएम की अध्यक्षता में चयन समिति एनजीओ का चयन करेगी। हालांकि एनजीओ का चयन करना जिलों के लिए स्वैच्छिक होगा।
सहारनपुर व संभल में आंगनबाड़ी केंद्रों पर गरमागरम खाना बनाकर पहुंचाने का जिम्मा एनजीओ को दिया गया है। जबकि अन्य जिलों में आंगनबाड़ी केंद्रों की कार्यकर्त्रियां ही यह काम कर रही हैं।
बर्तन व ईंधन की व्यवस्था नहीं होने से कई केंद्रों में गरमागरम खाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इसको देखते हुए सरकार ने अब यह योजना एनजीओ को देने का पूरा खाका तैयार कर लिया है।
चयन प्रक्रिया, भोजन पकाने व उसके वितरण की शर्तें, भुगतान की व्यवस्था, योजना की देखरेख व नियंत्रण को लेकर दिशा-निर्देश सरकार ने तय कर दिए हैं।
एनजीओ को खाना बनाने व पहुंचाने के लिए 2.25 रुपये प्रति बच्चा भुगतान किया जाएगा।
चयन समिति में ये होंगे शामिल
चयन समिति के अध्यक्ष डीएम या उनकी ओर से नामित सीडीओ या एडीएम होंगे। वहीं जिला कार्यक्रम अधिकारी सदस्य सचिव होंगे।
जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी वरिष्ठ कोषाधिकारी या वित्त अधिकारी इसमें सदस्य होंगे। डीएम की ओर से नामित कोई जिला स्तरीय अधिकारी या मान्यता प्राप्त गैर सरकारी प्रतिनिधि भी सदस्य होंगे।
ये हैं चयन के मापदंड
दो अखबारों में विज्ञापन देकर एनजीओ को आमंत्रित करना होगा। एनजीओ के पास सेंट्रल ऑटोमेटिक या सेमी ऑटोमेटिक किचन के साथ ही प्रशिक्षित रसोइये व स्टाफ होना चाहिए।
आंगनबाड़ी केंद्रों तक समय पर ताजा पका हुआ भोजन पहुंचाने की व्यवस्था होनी चाहिए।
ऐसे होगी निगरानी
इसके लिए जनपद स्तर पर डीएम की अध्यक्षता में टास्क फोर्स बनेगी। इसमें सीडीओ, सीएमओ सहित कई अधिकारी शामिल होंगे।
परियोजना स्तर पर उप जिलाधिकारी की अध्यक्षता में समिति बनाई जाएगी जिसमें खंड विकास अधिकारी, बाल विकास परियोजना अधिकारी सहित कई अधिकारी शामिल होंगे।
भोजन की गुणवत्ता का परीक्षण आंगनबाड़ी कार्यकत्री व मातृ समिति के सदस्य करेंगे। प्रतिदिन उपलब्ध होने वाले भोजन के मेन्यू को आंगनबाड़ी केंद्र पर दर्ज किया जाएगा।