लखनऊ। गोमतीनगर स्थित संगीत नाटक अकादमी में मंगलवार शाम को सोनचिरैया संस्था की ओर से आयोजित समारोह में उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध लोक गायिका पद्मश्री डॉ. बसंती बिष्ट को लोक निर्मला सम्मान-2025 से नवाजा गया। मुख्य अतिथि केजीएमयू की कुलपति पद्मश्री डॉ. सोनिया नित्यानंद ने 72 वर्षीय बसंती बिष्ट को एक लाख रुपये की सम्मान राशि, प्रशस्ति पत्र और शॉल ओढ़ाकर सम्मानित किया। बसंती बिष्ट ने मंच पर लोकगीतों की प्रस्तुति भी दी।
मुख्य अतिथि डॉ. सोनिया नित्यानंद ने कहा कि डॉ. बसंती बिष्ट स्व सशक्तीकरण का सबसे बड़ा उदाहरण हैं, जिन्होंने संघर्ष के बल पर यह मुकाम हासिल किया है। देश के विकास के साथ ही हमें विरासत को भी संजोने की जरूरत है।
पद्मश्री मालिनी अवस्थी ने अपनी मां निर्मला अवस्थी की स्मृति में इस सम्मान की शुरुआत कर इसी विरासत को आगे बढ़ाया है। सोनचिरैया संस्था की सचिव लोकगायिका मालिनी अवस्थी ने कहा, लखनऊ हमारी पहचान है। बीते कई वर्षों से सोनचिरैया भारत की विभिन्न लोक कलाओं के संरक्षण के लिए अनवरत कार्य कर रही है।
उन्होंने बताया कि पहला लोक निर्मला सम्मान पद्मभूषण तीजन बाई को प्रदान किया गया था। फिर पद्मश्री गुलाबो सपेरा, पद्मभूषण शारदा सिन्हा, कर्नाटक की प्रतिष्ठित लोक कलाकार पद्मश्री मजम्मा जोगती और सुप्रसिद्ध कजरी गायिका पद्मश्री उर्मिला श्रीवास्तव को यह सम्मान प्रदान किया गया।
इस बार डॉ. बसंती बिष्ट को यह सम्मान देने का निर्णय किया गया। उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड भौगोलिक रूप से भले ही अलग-अलग प्रदेश हों लेकिन हम सांस्कृतिक रूप से एक ही हैं।
इस मौके पर सोनचिरैया की अध्यक्ष डॉ. विद्या विंदु सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार अवनीश अवस्थी, संगीत नाटक अकादमी के अध्यक्ष जयंत खोत, उपाध्यक्ष विभा सिंह समेत मालिनी अवस्थी के परिवारीजन व अन्य लोग मौजूद रहे।
लोक के बिना जीवन रसहीन : पद्मश्री बसंती बिष्ट
लोक निर्मला सम्मान से विभूषित की गईं डॉ. बसंती बिष्ट ने कहा, लोक के बिना जीवन रसहीन है। हमें अपनी लोक कलाओं को जीवित रखने के प्रयास निरंतर करते रहने होंगे। उन्होंने कांसे की थाली और हुड़का जैसे वाद्ययंत्रों के बीच शिव की स्तुति से गायन की शुरुआत की। उनकी सुरीली आवाज में मां भगवती नंदा के जागरों से मंच गूंज उठा। इस दौरान बुंदेली और राजस्थानी लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने भी मन मोह लिया। मेवा सपेरा के ग्रुप ने कालबेलिया की प्रस्तुति से माहौल को लोकमय बना दिया।