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अवध में बाढ़ से बदतर हो रहे हालात, पेड़ों पर रात काट रहे लोग

Sun, 31 Jul 2016 10:15 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लखनऊ
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अवध में बाढ़ - फोटो : amar ujala
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अवध में बाढ़ से हालात लगातार बदतर होते जा रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोग जान बचाने के लिए अब पेड़ों का सहारा ले रहे हैं। प्रशासन की ओर से मदद न मिलने से बाढ़ पीड़ित भूखे-प्यासे रहने को मजबूर हैं।
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बलरामपुर के सदर विकास खंड के कई गांव पूरी तरह राप्ती के पानी से घिरे हैं। नदी खतरे के निशान से 48 सेमी. ऊपर बह रही है। चौकाकला गांव में बाढ़ पीड़ित मोल्हू व हरिद्वार का परिवार ने घर में बाढ़ का पानी घुसने के बाद शनिवार को पूरी रात पेड़ पर चढ़कर गुजारी।

रविवार शाम को पानी कम होने पर सभी उतरकर गांव के बाहर पहुंचे। तुलसीपुर के देवलहा व नयनसुखवा गांव में बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए एनडीआरएफ की टीम लगाई गई है। जबकि गोंडा के करनैलगंज व तरबगंज तहसील क्षेत्र में बाढ़ का खतरा बरकरार है।
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करनैलगंज में एल्गिन-चरसड़ी बांध में कटान जारी है, जबकि नवाबगंज में 13 गांव पानी से घिरे हैं। यहां जैतपुर माझा गांव को जाने वाली सड़क बाढ़ में बह गई है। करनैलगंज में रविवार को घाघरा खतरे के निशान से 74 सेंमी. ऊपर बह रही थी।
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बहराइच में घाघरा का जलस्तर बढ़ा

- फोटो : amar ujala
वहीं, बहराइच में नेपाल से छोड़े गए ढाई लाख क्यूसेक पानी से घाघरा का जलस्तर बढ़ गया है। इससे आसपास के गांवों में संकट बढ़ गया है। बाराबंकी में भी घाघरा खतरे के निशान से 64 सेमी ऊपर पहुंच गई है।

नदी का पानी क्षेत्र के 14 गांवों में घुस गया है। उधर, फैजाबाद में सरयू खतरे के निशान से 28 सेंमी. ऊपर बह रही है। इसके साथ ही अयोध्या-बिल्वहरिघाट व चिर्राखजुरी बंधे पर कटान का खतरा बढ़ गया है।

सीतापुर में घाघरा की लहरों ने टापू पर बसे पचीसा गांव में तबाही मचानी शुरू कर दी है। यहां के 18 घर नदी में समाहित हो गए। कई परिवार घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर गए हैं।
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