कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र में गेरुआ नदी पार भरथापुर गांव के निकट सोमवार सुबह पहुंचे नेपाली हाथियों के झुंड ने ग्रामीण को पटककर मार डाला। ग्रामीण राशन खरीदने के लिए बिछिया बाजार जा रहा था। काफी देर बाद ग्रामीणों को घटना की जानकारी हुई तब सूचना रेंज कार्यालय दी गई। वन कर्मियों की टीम गांव पहुंची है।
समाज कल्याण राज्यमंत्री ने भी गांव पहुंचकर मुआयना किया है। डब्लू-डब्लू एफ और वन विभाग की ओर से ग्रामीण के परिवारीजनों को राहत सहायता प्रदान की गई है। लाश को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। ग्रामीण घटना के बाद दहशत में हैं।
कतर्नियाघाट संरक्षित वन क्षेत्र अंतर्गत कतर्नियाघाट रेंज में गेरुआ नदी पार भरथापुर गांव जंगल के निकट स्थित है। गांव निवासी रूदल (35) पुत्र बेचू राजभर के घर में सोमवार सुबह राशन खत्म हो गया था। चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी भी नहीं थी। इसके चलते वह गांव के निकट जंगल में लकड़ियां इकट्ठा करने के बाद राशन लाने बिछिया बाजार जा रहा था।
मारने के बाद आक्रोशित होकर चिंघाड़ने लगे हाथी
पिता की मौत पर अनाथ हुए बच्चे
- फोटो : amar ujala
रूदल जब पाताल चूही के जंगल से होकर गेरुआ नदी की ओर बढ़ रहा था। तभी रास्ते में हाथियों के झुंड से सामना हो गया। अनुमान लगाया जा रहा है कि रूदल को हाथियों के झुंड ने घेर लिया और सूंड़ में लपेट पटक कर मार डाला। इसके बाद हाथी चिंघाड़ने लगे।
इस पर गांव के लोग हाथियों के झुंड की ओर बढ़े। सभी ने हांका लगाया। जिसके चलते हाथी गेरुआ नदी की ओर चले गए। मौके पर रूदल मृत हालत में मिला। तत्काल रेंज कार्यालय को सूचना दी गई।
डिप्टी रेंजर रमेश चंद्र, कबीरुल हसन, वन रक्षक अशफाक, सुजौली थानाध्यक्ष कपिलदेव दलबल के साथ गांव पहुंचे। मौके पर हाथियों के पदचिह्न व संघर्ष के निशान थे। जिससे लग रहा था कि हाथियों ने सूंड़ में लपेटकर पटक कर रूदल को मार डाला। सूचना पाकर परिवारीजन भी मौके पर बिलखते हुए पहुंच गए।
समाज कल्याण राज्यमंत्री बंशीधर बौद्ध ने भी घटनास्थल पर पहुंचकर मुआयना करने के बाद लोगों को ढांढस बंधाया। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। डीएफओ आशीष तिवारी ने बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने के बाद वन विभाग की ओर से मुआवजे की कार्रवाई शुरू की जाएगी।
चावल और आटा लाने के लिए घर से निकले थे बापू
परिजनों को राहत सहायता प्रदान करते राज्यमंत्री बंशीधर बौध
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हाथियों के हमले में रूदल की मौत के चलते अब घर में सिर्फ उसका बड़ा बेटा सोनू (9) और छोटी बहन गुंचा (5) ही बचे हैं। मां दो साल पहले ही घर छोड़कर चली गई थी। रूदल की मौत के बाद सोनू और छोटी बहन गुंचा की आंखों से आंसू थम नहीं रहे।
वन विभाग की टीम जब मौके पर पहुंची तो फफकते हुए सोनू ने बताया कि घर में राशन खत्म हो गया था। चूल्हा जलाने के लिए लकड़ी भी नहीं थी।
इसका इंतजाम करने के लिए बापू ने बिछिया बाजार जाने की बात कही थी। यह भी कहा था कि एक घंटे में लौट आएंगे। वनकर्मी और ग्रामीण सोनू को ढांढस बंधा रहे हैं, लेकिन उसकी आंखों से आंसू थम नहीं रहे हैं।
तात्कालिक सहायता के रूप में दिया 20 हजार
इस पर डीएफओ आशीष तिवारी का कहना है कि हाथियों के हमले में दम तोड़ने वाले रूदल के परिवार को तात्कालिक सहायता के रूप में डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और वन विभाग की ओर से 10-10 हजार रुपये प्रदान किये गए हैं। अभी वन विभाग की ओर से 4.90 लाख रुपये का मुआवजा भी दिया जाएगा।