आजादी के बाद 1952 में पहला चुनाव सादे कागज के जरिये हुआ था। तब मतगणना लगभग 15 दिन तक चली थी। 1962 में यूूपी विधानसभा चुनाव में आयोग ने बैलेट पेपर का प्रयोग किया। चुनाव हाईटेक बनाने के लिए 1999 में गोवा विधानसभा चुनाव में पहली बार ईवीएम का प्रयोग हुआ। अब पांच घंटे में ही सरकार की तस्वीर साफ हो जाती है।
देश में पहला चुनाव 1952 में हुआ था। उस दौरान ज्यादातर जगहों पर चुनावी मैदान में एक या दो प्रत्याशी होते थे। इनके समर्थकों को प्रत्याशियों के रंग का डिब्बा बता दिया जाता था। इनमें प्रत्याशी के समर्थक वोट के रूप में सादे कागज डालते थे।
मतदान होने के बाद कागजों की गिनती होती थी। विधानसभा का पहला चुनाव 1957 में हुआ था। उसमें लकड़ी के डिब्बों पर प्रत्याशियों का नाम और चुनाव चिह्न लिखा जाने लगा। 1962 में प्रक्रिया बदल गई। प्रत्याशियों के नाम व चुनाव चिह्न वाले बैलेट पेपर दिए जाने लगे। इन पर मुहर लगने लगी। यह प्रक्रिया 40 वर्ष तक चली। फिर ईवीएम ने चुनाव प्रक्रिया में क्रांतिकारी बदलाव ला दिया।
2007 में ईवीएम से यूपी विस चुनाव
गोवा के बाद 2002 में विभिन्न प्रदेशों के चुनाव में ईवीएम का प्रयोग हुआ। 2004 लोकसभा चुनाव में पूरे देश में ईवीएम से वोट पड़े। ईवीएम से 2007 में पहली बार यूपी विधानसभा चुनाव कराया गया।
हैदराबाद व बंगलूरू में बनती हैं ईवीएम...भारतीय इलेक्ट्रॉनिक्स लि. (बंगलूरू) व इलेक्ट्रॉनिक्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लि. (हैदराबाद) के सहयोग से ईवीएम तैयार की गई। दिसंबर 1988 में जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 में नई धारा जोड़ी गई जिसमें आयोग को ईवीएम के उपयोग का अधिकार दिया गया।