मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि 5 सप्ताह के बाद राज्य में कोविड-19 के एक्टिव मरीजों की संख्या 50 हजार से कम हुई है। उन्होंने चिकित्सा के बेहतर उपाय करते हुए एक्टिव मरीजों की संख्या में और कमी लाने के निर्देश दिए हैं। मुख्यमंत्री शुक्रवार को अपने आवास पर उच्चस्तरीय बैठक में अनलॉक व्यवस्था की समीक्षा कर रहे थे। उन्होंने लखनऊ, कानपुर नगर, मेरठ, गोरखपुर तथा वाराणसी में विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए। कहा कि इन जिलों में चिकित्सा व्यवस्था को सुदृढ़ करते हुए कोविड-19 से संक्रमित मरीजों की रिकवरी दर में वृद्धि की जाए।
उन्होंने अपर मुख्य सचिव स्वास्थ्य तथा अपर मुख्य सचिव चिकित्सा शिक्षा को निर्देशित किया कि वे इन जिलों के डीएम, व सीएमओ से नियमित संवाद बनाए रखें। चिकित्सालयों, मेडिकल कॉलेजों तथा चिकित्सा संस्थानों की उपचार व्यवस्था की गहन मॉनिटरिंग भी करें। उन्होंने कहा कि कोविड-19 के संक्रमण को नियंत्रित करने में सर्विलांस, कॉंटेक्ट ट्रेसिंग तथा मेडिकल टेस्टिंग की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह सुनिश्चित किया जाए कि यह ये सभी काम प्रभावी ढंग से होते रहे। उन्होंने कहा कि इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर की व्यवस्थाओं को सुचारु रखा जाए। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश में 1.50 लाख कोविड टेस्ट प्रतिदिन किए जाएं, जिनमें आरटीपीसीआर विधि से 60 हजार टेस्ट किए जाएं।
ऑनलाइन ओपीडी सुविधाओं का लाभ दिलाएं
सीएम योगी ने ई-संजीवनी एप का व्यापक प्रचार-प्रसार करते हुए अधिक से अधिक लोगों को इसके माध्यम से ऑनलाइन ओपीडी का लाभ सुलभ कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सीएम हेल्पलाइन के माध्यम से होम आइसोलेशन में रह रहे मरीजों के साथ-साथ अस्पताल में उपचार करा रहे रोगियों से संवाद स्थापित रखा जाए। उन्होंने कहा कि कोविड-19 से बचाव के बारे में लोगों को जागरूक किया जाए। इसके लिए प्रचार माध्यमों के साथ-साथ पब्लिक एड्रेस सिस्टम का उपयोग किया जाए। उन्होंने कहा कि वे कोविड-19 से बचाव तथा यातायात सुरक्षा के संबंध में लोगों को जानकारी दें।
सिविल सेवा परीक्षा कल, सभी इंतजाम करें
मुख्यमंत्री ने 4 अक्टूबर को आयोजित होने वाली संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा को सुचारु ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी आवश्यक प्रबंध करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत पैकेज के माध्यम से पात्र लोगों को ऋण उपलब्ध कराने की व्यवस्था को और गति दी जाए। धान क्रय केंद्रों पर आवश्यकता के अनुसार अतिरिक्त मैनपावर की तैनाती की जाए, ताकि खरीद सुचारू ढंग से होती रहे। इससे कोरोना काल में भीड़ एकत्र होने की संभावना भी नहीं रहेगी।