संतकबीरनगर के चंद्रौटी निवासी अभिषेक यादव, धनवजल हरिहरपुर निवासी रितेश यादव, भवानीगरा बघौली निवासी सुनील कुमार, नोक्ता निवासी संदीप कुमार, अम्मादेई निवासी विजय कुमार लखनऊ में रहकर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते थे। अभिषेक के मुताबिक इसी दौरान उनकी मुलाकात प्रयागराज के गायत्री नगर निवासी दीपक दुआ से हुई। दीपक ने दावा किया कि उसके पास नौकरी दिलाने वाले लोग हैं। उसने कई राज्यों में सैकड़ों लोगों को नौकरी दिलाने की बात कही। दीपक ने बताया कि दिल्ली के नजफगढ़ स्थित रोशन गार्डन में रहने वाला उसकी मौसी का लड़का अजीत सिंह दिल्ली में कई परीक्षा कराने वाली कंपनियां चलाता है। दीपक की बात मानकर अभिषेक ने अपने दोस्तों को इसके बारे में बताया। दीपक ने बताया था कि उसके कुछ लोग लखनऊ आने वाले हैं। परीक्षा के ही संबंध में उनकी प्रमुख सचिव से मीटिंग है। दीपक ने पीड़ितों को उन लोगों से मिलवाने की बात कही।
इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर हुई थी मीटिंग
दीपक के कहने पर अभिषेक और उसके साथी इंजीनियरिंग कॉलेज चौराहे पर पहुंचे, जहां फ्लाईओवर के नीचे उन लोगों की मुलाकात कराई गई। दीपक के साथ वहां पर उसकी बहन ज्योति दुआ, कुशीनगर के पथरदेवा सिथत दुबौली निवासी मो. इसमाइल, उसकी पत्नी बेगम नूरजहां, अजीत सिंह, उसकी पत्नी मुकेश लता, बागपत सिखेड़ा निवासी मोनू और गुरुग्राम के सेक्टर छह निवासी रवि कटारिया मौजूद थे। आरोपियों ने बताया कि सचिवालय में भर्ती आई है, जिसकी जिम्मेदारी उन लोगों को ही मिली है।
प्रति अभ्यर्थी 12 लाख में तय हुई थी डील
मीटिंग में आरोपियों ने प्रति अभ्यर्थी 12 लाख रुपये में डील तय की। सभी से एक सप्ताह में रकम जमा करने के लिए कहा गया। एक हफ्ते में पीड़ितों ने छह-छह लाख रुपये और मूल दस्तावेज दीपक को दे दिए। शेष रकम मो. इस्माइल के खाते में जमा की गई। काफी दिन तक रिजल्ट नहीं आने पर पीड़ितों ने संपर्क किया। इस पर आरोपी ने सभी को फिर से इंजीनियरिंग कॉलेज के पास बुलाया और उन्हें जाली नियुक्तिपत्र थमा दिए।
सचिवालय पहुंचे तो फर्जीवाड़े की हुई जानकारी
दीपक ने पीड़ितों से दस दिन बाद सचिवालय जाकर कार्यभार ग्रहण करने के लिए कहा। सचिवालय पहुंचने पर पता चला कि कोई नियुक्तिपत्र जारी नहीं हुआ है। ठगी की जानकारी होने पर पीड़ितों ने आरोपियों से संपर्क किया। आरोपियों ने उन्हें दिल्ली बुलाकर दूसरे विभाग में नौकरी दिलाने का झांसा दिया। छानबीन में पता चला कि आरोपी गिरोह बनाकर फर्जीवाड़ा करते हैं और कई जेल में बंद हैं। इंस्पेक्टर मड़ियांव शिवानंद मिश्रा के अनुसार, मामले की जांच कर साक्ष्य संकलन किए जा रहे हैं।