प्रदेश सरकार ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) के निर्देश पर प्रदूषण नियंत्रण के लिए गठित पांच अनुश्रवण समितियां भंग कर दी हैं। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन के लिए बनी अनुश्रवण समिति भी 15 जुलाई से समाप्त मानी जाएगी। इन छह अनुश्रवण समितियों को सेवानिवृत्त जज और नौकरशाहों की अध्यक्षता में गठित किया गया था।
इनके स्थान पर अधिकारियों की अध्यक्षता में ही तत्काल प्रभाव से वैकल्पिक व्यवस्था कर दी गई है। एनजीटी ने अपने आदेश में कहा था कि इन समितियों के छह माह पूरे होने पर मुख्य सचिव इनके कार्यकाल को जारी रखने पर फैसला लेंगे।
इसके आधार पर शासन ने कार्यकाल न बढ़ाने का फैसला किया। मुख्य सचिव डॉ. अनूप चंद्र पांडेय की ओर से जारी आदेश के अनुसार, इन समितियों को समाप्त कर दिया गया है। इनमें न्यायमूर्ति एसयू खान की अध्यक्षता में हिंडन, काली और कृष्णा नदी के संरक्षण, उद्धार और प्रदूषण के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों व संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई के लिए बनी अनुश्रवण समिति शामिल है।
ठोस अपशिष्ट, प्लास्टिक व जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन पर संस्तुतियां देने के लिए न्यायमूर्ति देवी प्रसाद सिंह की अध्यक्षता में 16 जनवरी 2019 को बनी अनुश्रवण समिति कार्यकाल 14 जुलाई को खत्म हो रहा है। अगले दिन से इसे भी समाप्त माना जाएगा।